
विज्ञान और खोज
4,000 वर्ष पुराने चित्रित पत्थर से ऑस्ट्रोनेशियाई प्रवास का दुर्लभ प्रमाण मिला
इंडोनेशिया के वेतार द्वीप पर खुदाई में मिली चित्रित चूना-पत्थर की पट्टिका ने शुरुआती ऑस्ट्रोनेशियाई समुद्री विस्तार के दौरान साथ ले जाए गए प्रतीकों का दुर्लभ और विश्वसनीय काल-निर्धारण वाला प्रमाण दिया है। हुकनौर शैलाश्रय में मिली किताब के आकार की इस पत्थर की पट्टिका पर लाल रंग का सूर्य जैसा चित्र है, जिसे ऑस्ट्रोनेशियाई चित्रकला परंपरा से जोड़ा जाता है। इसकी पुरातात्विक परत से मिले लकड़ी के कोयले के आधार पर इसका समय लगभग 4,090 से 3,900 वर्ष पहले का निर्धारित किया गया है।
यह आकृति पूर्वी इंडोनेशिया और न्यू गिनी के निकट द्वीपों में पाई गई शैल कला से मिलती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ऑस्ट्रोनेशियाई भाषाएं बोली जाती हैं। पुरातत्वविदों को दीवारों पर बने चित्रों का काल निर्धारित करने में कठिनाई हुई है, इसलिए यह उठाकर ले जाने योग्य पट्टिका विशेष रूप से मूल्यवान है। हुकनौर में यह सबसे पुराने मृद्भांडों से लगभग 200 से 500 वर्ष पहले की है। शंकु-घोंघों के खोल से बने मनकों के इस्तेमाल की ओर बदलाव सांस्कृतिक परिवर्तन का अलग प्रमाण देता है; ऐसे मनके शुरुआती ऑस्ट्रोनेशियाई-संबद्ध स्थलों से भी मिले हैं।
निष्कर्ष संकेत देते हैं कि साझा विचार और पहचान, ऑस्ट्रोनेशियाई लोगों की आवाजाही का पता लगाने के लिए सामान्यतः इस्तेमाल की जाने वाली कुछ भौतिक वस्तुओं से पहले फैल गए होंगे। समुद्री मार्ग से हुए इस प्रसार ने अंततः मेडागास्कर से रापा नुई तक के समुदायों को जोड़ा। शोधकर्ता आगाह करते हैं कि पट्टिका से यह तय नहीं किया जा सकता कि चित्रकला परंपरा की शुरुआत कहां हुई, लेकिन यह जांच का नया रास्ता खोलती है कि विश्वास, अपनेपन की भावना और महत्वाकांक्षा ने लंबी समुद्री यात्राओं को किस तरह सहारा दिया होगा।