
विज्ञान और खोज
दो विपरीत घुमाव बताते हैं कि नारव्हाल का लंबा दांत इतना सीधा कैसे रहता है
शोधकर्ताओं ने उस आंतरिक संरचना का पता लगाया है, जिसकी वजह से नारव्हाल का लंबा और स्पष्ट रूप से सर्पिल दिखने वाला दांत असाधारण रूप से सीधा बढ़ता है। यह खोज किसी भी अन्य स्तनधारी के लंबे दांत से अलग इस संरचना से जुड़ी पुरानी पहेली सुलझाती है।
तीन यूरोपीय सिंक्रोट्रॉन केंद्रों में टेंसर टोमोग्राफी का इस्तेमाल करते हुए अंतरराष्ट्रीय दल ने दांत के नैनोमीटर स्तर के घटकों से लेकर उसके समग्र आकार तक का मानचित्रण किया। स्कैन में एक-दूसरे से जुड़ी दो कुंडलाकार संरचनाएं दिखीं: बाहरी सीमेंटम बाएं हाथ की दिशा वाले सर्पिल में घूमता है, जबकि भीतरी डेंटिन में खनिजीकृत कोलेजन संरचनाएं विपरीत दिशा में घूमती हैं।
विपरीत दिशाओं में मुड़ती ये परतें रस्सी के रेशों की तरह काम करती हैं और एक स्थिर मिश्रित संरचना बनाती हैं, जो मरोड़ और यांत्रिक विकृति का प्रतिरोध करती है। इनके विपरीत बल यह समझाने में मदद करते हैं कि सतह पर स्पष्ट सर्पिल बनने के बावजूद दांत अपना समग्र सीधा आकार कैसे बनाए रखता है। यह लंबा दांत आम तौर पर नर का ऊपरी बायां श्वदंत होता है, जो होंठ को भेदकर बढ़ता है और कई मीटर लंबा हो सकता है।
शोधकर्ताओं को पेड़ों के वलयों जैसी वृद्धि परतें भी मिलीं। इनमें जीव के पूरे जीवन के दौरान आर्कटिक की जलवायु और भोजन की उपलब्धता के संकेत सुरक्षित हो सकते हैं। एक रहस्य अब भी बना हुआ है: दांत का सटीक जैविक कार्य अब भी बहस का विषय है। सामाजिक और प्रजनन संबंधी प्रदर्शन प्रमुख व्याख्याओं में शामिल हैं, जबकि संवेदनात्मक इस्तेमाल का सुझाव भी दिया गया है।