
विज्ञान और खोज
देर तक बनी रही ब्रह्मांडीय चमक मृत तारों की टक्कर का संकेत देती है
खगोलविदों को देर तक बनी रही एक्स-रे चमक और दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर के बीच संबंध के मजबूत साक्ष्य मिले हैं। न्यूट्रॉन तारे मृत तारों के अत्यंत घने अवशेष होते हैं। यह परिणाम आकाश में दिखाई देने वाली कुछ रहस्यमय चमकों की उत्पत्ति का सुराग देता है।
4 जुलाई 2025 को उपग्रहों ने लगभग आधा सेकंड तक चले गामा-किरण विस्फोट का पता लगाया। आइंस्टीन प्रोब उपग्रह ने उसी घटना से निकली एक्स-रे भी दर्ज कीं, जो करीब दस मिनट तक जारी रहीं। आकाश के बड़े हिस्से पर नजर रखने की उसकी क्षमता ने उसे ऐसी गतिविधि दर्ज करने में सक्षम बनाया, जो पहले के उपकरणों से छूट सकती थी।
चिली के वेरी लार्ज टेलीस्कोप से बाद में किए गए अवलोकनों ने दिखाया कि इस प्रकाश ने छह अरब साल से अधिक की यात्रा की थी। कोई सुपरनोवा दिखाई नहीं दिया, जिससे इस घटना को किसी विशाल तारे के ढहने से अलग पहचानने में मदद मिली। विस्फोट की विशेषताओं के साथ मिलकर ये साक्ष्य तारों की टक्कर की ओर संकेत करते थे।
एक्स-रे में तेजी से उतार-चढ़ाव आया और उनकी ऊर्जा बदली। इससे संकेत मिला कि टक्कर के केंद्र में गतिविधि जारी थी, न कि यह केवल फैलती हुई विस्फोट-तरंग की मंद पड़ती चमक थी। इसकी एक संभावित व्याख्या नवजात मैग्नेटार है: तेजी से घूमता न्यूट्रॉन तारा, जिसका चुंबकीय क्षेत्र असाधारण रूप से शक्तिशाली होता है। ब्लैक होल की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सका।
Science Bulletin में प्रकाशित अध्ययन से संकेत मिलता है कि ऐसे ही एक्स-रे संकेत अन्य टक्करों के साथ भी उत्पन्न होते होंगे, लेकिन संभव है कि अब तक उनका पता न चला हो।