
स्वास्थ्य और उपचार
उन्नत इमेजिंग से चुनिंदा स्ट्रोक मरीजों को 24 घंटे बाद भी इलाज का मौका
मस्तिष्क की उन्नत इमेजिंग वियतनाम में इस्कीमिक स्ट्रोक के बाद देर से अस्पताल पहुंचने वाले कुछ लोगों को इलाज का नया मौका दे रही है। सीटी या एमआरआई परफ्यूजन स्कैन पहले से क्षतिग्रस्त ऊतक और अब भी ठीक हो सकने वाले ऊतक में अंतर कर सकते हैं। इससे विशेषज्ञों को तय करने में मदद मिलती है कि सामान्य उपचार समय-सीमा बीत जाने के बाद भी रक्त का थक्का निकालना लाभकारी हो सकता है या नहीं।
अगस्त में हो ची मिन्ह सिटी में स्ट्रोक पर हुई एक बैठक में चिकित्सकों ने एक 27 वर्षीय पुरुष का मामला बताया। शुरुआत में बोलने में कठिनाई और कमजोरी के उसके हल्के लक्षण बिगड़ गए और लक्षण शुरू होने के लगभग 60 घंटे बाद शरीर के एक ओर लकवा हो गया। परफ्यूजन इमेजिंग से पता चला कि मस्तिष्क के ऊतक का एक बड़ा हिस्सा अब भी बचाया जा सकता था। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी के बाद वह तेजी से ठीक हुआ और लगभग 10 दिन बाद करीब सामान्य ढंग से चलने लगा।
यह मामला उभरते साक्ष्यों को दर्शाता है, न कि सभी मरीजों के लिए उपचार की समय-सीमा बढ़ाए जाने को। लक्षण शुरू होने के 24 घंटे से अधिक समय बाद पहुंचने वाले मरीजों पर वियतनाम में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग आधे मरीज तीन महीने बाद लगभग बिना सहायता के चल सकते थे। LATE-MT अध्ययन से प्रस्तुत निष्कर्षों ने भी संकेत दिया कि इमेजिंग में बचाए जा सकने वाले ऊतक मिलने पर सावधानी से चुने गए मरीजों को 24 से 72 घंटे के बीच थ्रोम्बेक्टॉमी से लाभ हो सकता है।
यह संभावना वियतनाम में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां एक प्रमुख स्ट्रोक केंद्र के चिकित्सकों ने बताया कि केवल 12% मरीज तीन घंटे के भीतर पहुंचे थे। लेकिन समय-सीमा बढ़ने का अर्थ यह नहीं कि इंतजार करना सुरक्षित है। 24 घंटे बाद उपचार के लिए कड़ा आकलन जरूरी है और इसमें गंभीर जोखिम हैं। इसलिए अचानक चेहरे का एक ओर झुकना, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में कठिनाई या संतुलन बिगड़ना अब भी तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की मांग करता है।