
विज्ञान और खोज
खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा का पहला लघु ब्लेज़ार खोजा
खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा में पहले पुष्ट माइक्रोब्लेज़ार की पहचान की है। इससे शोधकर्ताओं को ब्लेज़ार कहलाने वाली विशाल ब्लैक होल प्रणालियों का एक छोटा और अधिक नजदीकी समकक्ष मिला है।
IRAS 18293-0941 नामक यह प्रणाली लगभग 12,000 प्रकाश-वर्ष दूर, अंतरतारकीय धूल की घनी परत के पीछे छिपी है। इसमें एक गर्म, विशाल तारा और उसकी हर 11.38 दिन में परिक्रमा करने वाला ब्लैक होल है। तारे से पदार्थ ब्लैक होल की ओर गिरता है, तो उसका कुछ हिस्सा विपरीत दिशाओं में दो जेट के रूप में बाहर निकलता है। इनमें से एक लगभग सीधे पृथ्वी की ओर है।
यही संरेखण इसे माइक्रोब्लेज़ार बनाता है। पूर्ण आकार के ब्लेज़ार दूरस्थ आकाशगंगाओं के केंद्रों में स्थित अतिविशाल ब्लैक होल से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। खगोलविदों ने तीन दशक पहले तारकीय पैमाने के ऐसे स्वरूपों की भविष्यवाणी की थी, लेकिन इससे पहले कोई भी संभावित उदाहरण विस्तृत जांच में खरा नहीं उतरा था।
स्पेन के हाएन विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने तारे के प्रकाश में सूक्ष्म बदलावों के माप को स्पष्ट रेडियो छवियों के साथ मिलाकर अध्ययन किया। इन अवलोकनों से प्रणाली के अभिविन्यास का पता चला और यह पुष्टि हुई कि जेट उसी का हिस्सा था, न कि उसके पीछे स्थित किसी असंबद्ध आकाशगंगा का। निष्कर्ष Astronomy & Astrophysics में प्रकाशित हुए।
यह खोज उन बदलावों को कुछ दिनों में देखने का अवसर देती है, जिनमें बड़े ब्लेज़ारों में हजारों वर्ष लग सकते हैं। शोधकर्ताओं को यह भी लगता है कि विपरीत दिशा वाले जेट की गैस के बादल से टक्कर उस क्षेत्र में पाई गई अति-उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणों की व्याख्या में मदद कर सकती है, हालांकि इस संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है।