
विज्ञान और खोज
खगोलविदों ने सूर्य जैसे साथी वाला दुर्लभ त्रि-तारा तंत्र खोजा
खगोलविदों ने एक दुर्लभ त्रि-तारा तंत्र की पुष्टि की है: तेजी से घूमता एक पल्सर, एक श्वेत बौना और उन दोनों की परिक्रमा करता सूर्य जैसा तारा। यह पल्सर वाला केवल दूसरा ज्ञात, पुष्ट त्रि-तारा तंत्र है।
चीन की FAST रेडियो दूरबीन ने पहली बार 2020 में पल्सर J0435+3233 का पता लगाया था। पल्सर किसी विस्फोटित तारे का अवशेष होता है, जो प्रकाशस्तंभ की तरह नियमित संकेत भेजता है। पांच वर्षों की निगरानी से पता चला कि वह और एक अन्य तारकीय अवशेष, श्वेत बौना, हर आठ दिन में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। लेकिन पल्सर के स्पंदनों के बीच का समय असामान्य रूप से तेजी से बढ़ रहा था।
चीनी विज्ञान अकादमी के हान जिनलिन के नेतृत्व वाली टीम ने FAST के अवलोकनों को अंतरराष्ट्रीय दृश्य प्रकाश, अवरक्त और गामा-किरण आंकड़ों के साथ जोड़ा। उन्होंने लगभग सूर्य जितने द्रव्यमान वाले तीसरे तारे की पहचान की, जो हर 73.5 वर्ष में इस जोड़ी की परिक्रमा करता है। उसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पल्सर के स्पंदनों के मापे गए समय में असामान्य बदलाव की व्याख्या करता है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि तीनों एक ही बादल से बने, लेकिन अलग-अलग दरों से विकसित हुए। पहले से ज्ञात पल्सर वाले त्रि-तारा तंत्र में दो श्वेत बौने हैं। इसके विपरीत, इस तंत्र में केवल तारकीय अवशेष नहीं, बल्कि अब भी सूर्य जैसा एक तारा मौजूद है।
एक यूरोपीय टीम भी समान अभिलेखीय आंकड़ों का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से इसी निष्कर्ष पर पहुंची। 9 अक्टूबर को The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित यह शोध त्रि-तारा तंत्रों के विकास की जांच और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों का परीक्षण करने का दुर्लभ अवसर देता है।