
विज्ञान और खोज
खगोलविदों ने बर्फीले सेंटॉर को धूमकेतु जैसा व्यवहार शुरू करते देखा
खगोलविदों ने बृहस्पति से परे परिक्रमा करने वाले बर्फीले पिंड 450P/LONEOS के रूपांतरण के एक दुर्लभ शुरुआती चरण को दर्ज किया है। कभी काफी हद तक निष्क्रिय रहे इस पिंड के ठोस केंद्र के आसपास अब गैस और धूल का एक बादल विकसित हो गया है, जिसकी चमक बढ़ रही है। इस संरचना को कोमा कहा जाता है।
Gemini North दूरबीन से किए गए अवलोकनों में यह बादल दिखाई दिया, जिसकी चमक 2019 से 2024 के बीच बढ़ी। James Webb Space Telescope के आंकड़ों ने इसमें कार्बन डाइऑक्साइड और बर्फ के कणों की पहचान की, जबकि जलवाष्प नहीं मिली। निष्कर्ष संकेत देते हैं कि सूर्य की गर्मी कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त कर रही है और धूल को सतह से दूर ले जा रही है, जिससे धूमकेतु जैसी गतिविधि पैदा हो रही है।
इस बदलाव की शुरुआत संभवतः 1992 में हुई, जब यह पिंड शनि से लगभग 46 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरा। ग्रह के गुरुत्वाकर्षण ने इसकी कक्षा बदल दी और सूर्य से इसकी न्यूनतम दूरी घटाकर लगभग 81.3 करोड़ किलोमीटर कर दी। इससे इस जमे हुए पिंड को अधिक धूप और गर्मी मिलने लगी।
सेंटॉर के रूप में वर्गीकृत 450P विशाल ग्रहों के बीच घूमता है और फिलहाल सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 22 वर्षों में पूरी करता है। यह अभी बृहस्पति-परिवार के धूमकेतुओं की कक्षीय परिभाषा पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि उनकी परिक्रमा अवधि 20 वर्षों से कम होती है। लेकिन लगातार गतिविधि और एक और गुरुत्वाकर्षणीय मुठभेड़ अंततः इस रूपांतरण को पूरा कर सकती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने का बहुमूल्य अवसर मिलता है कि बर्फ से समृद्ध निष्क्रिय पिंड सक्रिय धूमकेतु कैसे बनते हैं।