
फलती-फूलती प्रकृति
निर्यात किए गए कोयले से होने वाले उत्सर्जन पर ऑस्ट्रेलियाई समुदाय ने जीता ऐतिहासिक मुकदमा
ऑस्ट्रेलिया की हंटर वैली के एक सामुदायिक समूह ने हाई कोर्ट में ऐसा मुकदमा जीता है जो एक बड़ी कोयला खदान के विस्तार को रोकता है और विदेशों में कोयला जलाने से होने वाले उत्सर्जन की जांच को मजबूत करता है।
देश की सर्वोच्च अदालत ने 3-2 के फैसले में न्यू साउथ वेल्स के मुसवेलब्रुक के पास स्थित माउंट प्लेज़ेंट खदान को लेकर MACH Energy की अपील खारिज कर दी। प्रस्तावित विस्तार से सालाना कोयला उत्पादन लगभग दोगुना हो जाता और खदान का संचालन 2048 तक बढ़ जाता।
बहुमत वाले न्यायाधीशों ने पाया कि राज्य का स्वतंत्र नियोजन आयोग परियोजना के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को न्यूनतम करने की शर्तों पर विचार करने में विफल रहा था। इनमें निर्यात किए गए कोयले को जलाने से होने वाला उत्सर्जन भी शामिल है। विदेशों में होने वाला यह उत्सर्जन परियोजना के अनुमानित कुल उत्सर्जन का लगभग 98% है।
निवासियों के इस समूह ने चार साल से अधिक समय तक अदालतों में यह चुनौती जारी रखी। इसकी अध्यक्ष वेंडी वेल्स एक सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षिका हैं। शुरुआती मुकदमा हारने के बाद समूह न्यू साउथ वेल्स की अपील अदालत में सफल हुआ और फिर हाई कोर्ट में उस फैसले का बचाव किया।
यह ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च अदालत में सुना गया जलवायु परिवर्तन का पहला मामला था। समूह के वकीलों का कहना है कि यह फैसला न्यू साउथ वेल्स की पूरी नियोजन व्यवस्था पर विदेशों में होने वाले उत्सर्जन को कम करने के तरीकों पर विचार करने का दायित्व स्थापित करता है।
यह निर्णय विस्तार की मंजूरी को अमान्य करता है, न कि मौजूदा खदान को बंद करने का आदेश देता है। MACH Energy ने कहा कि वह फैसले को स्वीकार करती है और संचालन जारी रखने के विकल्प तलाशते हुए इसके प्रभावों की समीक्षा करेगी।