
विज्ञान और खोज
CERN ने ब्रह्मांडीय कणों की बौछार के शुरुआती क्षण प्रयोगशाला में दोहराए
CERN के भौतिकविदों ने प्रयोगशाला में ब्रह्मांडीय कणों की बौछार के शुरुआती क्षणों को दोहराया है। इससे अंतरिक्ष से आने वाले कणों की वैज्ञानिक व्याख्या को परखने के लिए नए साक्ष्य मिले हैं।
ब्रह्मांडीय किरणें तेज गति से चलते परमाणु नाभिक हैं। जब वे पृथ्वी के वायुमंडल में ऊंचाई पर मौजूद परमाणुओं से टकराती हैं, तो अन्य कणों की बौछार पैदा करती हैं। शोधकर्ता कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से इन बौछारों से पहले की प्रक्रिया का अनुमान लगाकर मूल ब्रह्मांडीय किरण के बारे में जानने की कोशिश करते हैं, लेकिन अलग-अलग मॉडल अलग-अलग उत्तर देते हैं।
इन मॉडलों को परखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने जुलाई 2025 में पहली बार लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में प्रोटॉन किरणपुंजों को ऑक्सीजन किरणपुंजों से टकराया। प्रोटॉन आने वाली ब्रह्मांडीय किरणों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि ऑक्सीजन वायुमंडल के एक घटक का।
ATLAS डिटेक्टर ने इससे पैदा हुई कणों की बौछारें दर्ज कीं। उनकी संख्या, ऊर्जा और दिशाएं मापकर टीम ने बौछार की शुरुआत का विस्तृत चित्र तैयार किया। Physical Review Letters में प्रकाशित निष्कर्षों ने दिखाया कि मौजूदा मॉडल इन अंतःक्रियाओं का सटीक वर्णन नहीं करते।
नए डेटा से शोधकर्ताओं को हाइड्रोजन से बनी ब्रह्मांडीय किरणों और भारी तत्वों से बनी किरणों के बीच अंतर करने में मदद मिलनी चाहिए। इससे उनके उद्गम के संकेत मिल सकते हैं और वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के कुछ सबसे चरम परिवेशों की जांच में मदद मिल सकती है।