
प्रौद्योगिकी और नवाचार
चीन ने पृथ्वी और चंद्रमा के बीच अपना पहला उच्च गति वाला दोतरफा लेज़र संचार संपर्क प्रदर्शित किया
चीन ने पृथ्वी और चंद्रमा के बीच 4,00,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर अपना पहला उच्च गति वाला दोतरफा लेज़र संचार संपर्क प्रदर्शित किया है। इस उपलब्धि से अंतरिक्ष में लेज़र संचार की उसकी क्षमता पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे बढ़कर पृथ्वी-चंद्रमा क्षेत्र तक पहुंच गई है।
प्रयोग में पृथ्वी से भेजे जाने वाले डेटा की शुरुआती गति 1.25 मेगाबिट प्रति सेकंड और वापसी संपर्क की गति 100 मेगाबिट प्रति सेकंड रही। इस डाउनलिंक गति पर चंद्रमा की सतह की एक 8K तस्वीर लगभग 12 सेकंड में भेजी जा सकती है, जबकि पारंपरिक माइक्रोवेव संपर्क से इसमें करीब चार से पांच मिनट लगते हैं।
इतनी लंबी दूरी तक संकीर्ण लेज़र किरण बनाए रखने के लिए उपग्रह और ज़मीनी दूरबीन को गति के दौरान भी बेहद सटीक संरेखण में रखना ज़रूरी था। शोधकर्ताओं ने कक्षा संबंधी अनिश्चितता, दूरबीन की स्थापना में त्रुटियां, वायुमंडलीय अपवर्तन और लेज़र के यात्रा समय जैसे कारकों को ध्यान में रखा। लौटने वाला संकेत बेहद कमज़ोर था, इसलिए टीम ने एक-एक फोटॉन का पता लगाने में सक्षम डिटेक्टरों के साथ ऐसे एल्गोरिद्म भी इस्तेमाल किए जो उपयोगी डेटा को पृष्ठभूमि के शोर से अलग कर सकें।
लेज़र संपर्क अधिक बैंडविड्थ, तेज़ संचार, सटीक दिशात्मकता और अधिक गोपनीयता दे सकते हैं, हालांकि उनकी संकीर्ण किरणों के कारण लक्ष्य पर सटीक निशाना साधना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। प्रदर्शित तकनीकें भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों, चंद्र अनुसंधान केंद्रों और सुदूर अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए बड़ी मात्रा में डेटा के संचार में मदद कर सकती हैं।