
प्रौद्योगिकी और नवाचार
मिट्टी की चुंबकीय स्मृति से प्राचीन कलाकृतियों की जांच का नया तरीका
शोधकर्ताओं ने समय के साथ बनने वाले एक कमज़ोर चुंबकीय संकेत को मापकर प्राचीन मिट्टी की कलाकृतियों और आधुनिक नकली वस्तुओं में अंतर करने में मदद करने वाला नया तरीका विकसित किया है। यह तकनीक संग्रहालयों, पुरातत्वविदों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसी वस्तुओं की जांच का एक और साधन दे सकती है, जिनके उत्खनन का इतिहास ज्ञात नहीं है।
मिट्टी को पकाने के बाद वस्तु के ठंडा होते समय उसके चुंबकीय कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को दर्ज कर लेते हैं। छोटे कण आसपास के चुंबकीय क्षेत्र के प्रति धीरे-धीरे प्रतिक्रिया करते रहते हैं, जिससे वह प्रभाव बनता है जिसे वैज्ञानिक श्यान अवशिष्ट चुंबकन कहते हैं। एक छोटे नमूने को दोबारा गर्म करने से यह द्वितीयक संकेत मिट जाता है, लेकिन अध्ययन में पाया गया कि आधुनिक मृद्भांडों की तुलना में प्राचीन मृद्भांडों से इसे मिटाने के लिए अधिक ताप की ज़रूरत पड़ी।
दल ने 45 ज्ञात वस्तुओं का परीक्षण किया। इनमें नियंत्रित पुरातात्विक उत्खननों से मिले मिट्टी के बर्तन, आधुनिक स्मृति-चिह्न और विशेष रूप से बनाई गई नकली वस्तुएं शामिल थीं। सभी 26 आधुनिक वस्तुओं का संबंधित संकेत 112 डिग्री सेल्सियस से नीचे मिट गया, जबकि निश्चित रूप से 1,000 वर्ष से अधिक पुरानी 19 कलाकृतियों में यह संकेत मिटने के लिए तापमान उस सीमा से ऊपर जाना पड़ा। कंप्यूटर मॉडल ने प्रयोगशाला के नतीजों का समर्थन किया। पुरावस्तुओं से संबंधित कानून प्रवर्तन कार्रवाई में बरामद तीन वस्तुओं से भी उनके प्राचीन होने के अनुरूप प्रमाण मिले।
Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित यह विधि वस्तु की सटीक तिथि निर्धारित नहीं करती और न ही बताती है कि वस्तु कहां मिली थी। लगभग 1,000 वर्ष से कम पुराने मृद्भांडों के लिए इसकी उपयोगिता भी कम हो सकती है। फिर भी, विवादित कलाकृतियों के आकलन के लिए यह मापे जा सकने वाले प्रमाण का एक और आधार जोड़ती है और आगे के शोध से अधिक सटीक बन सकती है।