
फलती-फूलती प्रकृति
दिल्ली ने रिज के 1,000 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र को वन संरक्षण देने की मंजूरी दी
दिल्ली ने दक्षिणी रिज के लगभग 1,000 एकड़ (400 हेक्टेयर) अतिरिक्त क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा देने की मंजूरी दी है। इससे इस भूमि को अंतिम कानूनी संरक्षण देने का लंबे समय से लंबित प्रयास आगे बढ़ा है। सरकार के अनुसार, इस फैसले से राजधानी में औपचारिक रूप से संरक्षित रिज क्षेत्र लगभग 13,000 एकड़ (5,250 हेक्टेयर) हो जाएगा।
यह भूमि पहली बार 1994 की एक प्रारंभिक अधिसूचना के जरिए भारत के वन कानून के दायरे में आई थी, लेकिन आरक्षित वन का अंतिम दर्जा दशकों से लंबित था। नई स्वीकृत अधिसूचना का उद्देश्य भारतीय वन अधिनियम के तहत उस प्रक्रिया को पूरा करना है।
रिज अरावली पर्वतमाला का विस्तार है और इसका दक्षिणी हिस्सा पर्वतमाला के उत्तरी छोर पर एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कड़ी बनाता है। वन्यजीवों और वनस्पतियों को सहारा देने के साथ-साथ यह धूल को नियंत्रित करने और स्थानीय तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।
कानूनी संरक्षण आगे किए जाने वाले काम का एक हिस्सा है। सरकार का कहना है कि वह क्षतिग्रस्त क्षेत्रों को बहाल करने, देशज प्रजातियों को बढ़ावा देने और आक्रामक वनस्पतियों का प्रबंधन करने की भी योजना बना रही है। 2026 में स्थापित दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड संरक्षण और बहाली के प्रयासों की निगरानी करेगा।
रिज के अन्य भूखंडों में अब भी अतिक्रमण और मौजूदा बस्तियों समेत भूमि उपयोग से जुड़े अनसुलझे मुद्दे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पात्र क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से संरक्षण देने पर विचार किया जाएगा। इससे दिल्ली के एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक भू-दृश्य को सुरक्षित रखने का प्रयास जारी रहेगा।