
विज्ञान और खोज
डीएनए से दूरदराज के द्वीपों पर पेंगुइन की नई प्रजाति का पता चला
वैज्ञानिकों ने दक्षिणी हिंद महासागर के दूरदराज स्थित केर्गुएलन द्वीपों की पेंगुइनों को एक अलग प्रजाति के रूप में पहचाना है। इससे वह विविधता सामने आई है जो इन पक्षियों के एक जैसे दिखने के कारण पहले छिपी हुई थी।
हाल में वर्णित दक्षिणपूर्वी जेंटू पेंगुइन, Pygoscelis kerguelensis, अपने निकट संबंधियों जैसी ही दिखती है। लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय दल ने पाया कि उसका डीएनए उसे एक अलग विकासवादी वंश के रूप में चिह्नित करता है। शोधकर्ताओं ने व्यापक क्षेत्र में फैली एक प्रजाति के बजाय जेंटू की चार प्रजातियों को मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है।
कम्युनिकेशंस बायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में 10 प्रजनन कॉलोनियों की 64 पेंगुइनों के डीएनए का विश्लेषण किया गया। इसमें इस समूह का लगभग पूरा भौगोलिक विस्तार शामिल था। दल ने शारीरिक विशेषताओं, आवाजों, आहार और प्रजनन व्यवहार की भी जांच की।
जेंटू पेंगुइन अक्सर घोंसला बनाने के लिए परिचित स्थानों पर लौटती हैं और कई तरह के शिकार खा सकती हैं, जिससे भोजन के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो जाती है। समय के साथ अलग-थलग द्वीपों की आबादियों में विशिष्ट आनुवंशिक विशेषताएं विकसित हुईं।
यह खोज संरक्षणकर्ताओं को अनदेखे जोखिम पहचानने में मदद कर सकती है। जब सभी पक्षियों को एक ही प्रजाति के रूप में गिना जाता है, तो दक्षिणी जेंटू की बड़ी आबादी में वृद्धि अन्य जगहों की मुश्किलों को छिपा सकती है। प्रत्येक प्रजाति का अलग आकलन करने से छोटी द्वीपीय आबादियों पर पड़ रहे दबाव सामने आ सकते हैं।
अध्ययन की जलवायु मॉडलिंग से संकेत मिलता है कि 2050 तक चार में से तीन समूहों के लिए अनुकूल समुद्री परिस्थितियों का दायरा सिमट सकता है, हालांकि इससे पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि पक्षी कैसे प्रतिक्रिया देंगे। शोधकर्ताओं ने कॉलोनियों की अद्यतन गणना और अलग-अलग संरक्षण आकलन की मांग की है।