
विज्ञान और खोज
प्रयोगशाला में बनाए गए एन्सेलाडस के महासागर जैसे वातावरण में पनपे पृथ्वी के सूक्ष्मजीव
पृथ्वी के गहरे समुद्र के सूक्ष्मजीव प्रयोगशाला में बनाए गए ऐसे वातावरण में पनपे हैं, जिसकी रासायनिक संरचना शनि के उपग्रह एन्सेलाडस की बर्फ के नीचे मौजूद माने जाने वाले महासागर जैसी है। उनका पनपना इस बात का नया प्रमाण देता है कि यह दूरस्थ महासागर जीवन के कुछ रूपों को सहारा दे सकता है।
माना जाता है कि एन्सेलाडस की जमी हुई बाहरी परत के नीचे खारे पानी का एक विशाल महासागर है। अंतरिक्ष में निकलने वाले जलवाष्प और बर्फ के फव्वारों ने इसे पृथ्वी से परे जीवन की खोज का एक आशाजनक लक्ष्य बनाया है।
शोधकर्ताओं ने उस महासागर और उसके तल की प्रमुख विशेषताओं को दोहराने के लिए पानी, लवण, कार्बोनेट और चट्टान का चूर्ण मिलाया। पानी और चट्टान के बीच प्रतिक्रियाओं से हाइड्रोजन निकली, जिसका उपयोग सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलकर मीथेन बनाने और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए करते हैं।
मूल रूप से जापान और ताइवान के बीच समुद्रतल पर गर्म पानी के स्रोतों के पास मिले ये जीव उस पानी में पनपे जो उनकी पहले ज्ञात सहनशीलता की सीमा से कहीं अधिक क्षारीय था। उन्होंने उपलब्ध कार्बन डाइऑक्साइड की बेहद कम मात्रा का उपयोग करने के लिए अपने चयापचय में भी बदलाव किया। ये निष्कर्ष Science Advances में प्रकाशित हुए।
यह प्रयोग साबित नहीं करता कि एन्सेलाडस पर जीवन है। यह केवल कुछ दिनों तक चला, इसलिए ऐसे सूक्ष्मजीव वहां कहीं अधिक लंबी अवधि तक जीवित रह सकते हैं या नहीं, यह अभी अज्ञात है। लेकिन यह दर्शाता है कि इस उपग्रह की अनुमानित रासायनिक परिस्थितियों में से कुछ जीवन की संभावना को खारिज नहीं करतीं।