
स्वास्थ्य और उपचार
प्रायोगिक नैनोजेल ने अल्ज़ाइमर जैसे रोग वाले चूहों में स्मृति-संबंधी व्यवहार सुधारा
एंटीबॉडी ले जाने वाले एक प्रायोगिक नैनोजेल की नसों के ज़रिए दी गई दो खुराकों ने अल्ज़ाइमर जैसे रोग का मॉडल बनाने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए चूहों में स्मृति-संबंधी प्रदर्शन और रोज़मर्रा की गतिविधियों जैसे व्यवहार में सुधार किया। अगले कुछ हफ्तों में उपचार पाने वाले चूहों ने पानी की भूलभुलैया में अधिक कुशलता से रास्ता ढूंढ़ा और घोंसले बनाने की अपनी क्षमता वापस हासिल की, जबकि बिना उपचार वाले चूहों में ऐसे सुधार नहीं दिखे। मस्तिष्क के विश्लेषण में न्यूरॉनों का अधिक घनत्व और सूजन-संबंधी अणुओं का कम स्तर मिला।
Nano-ERASER नामक इस पद्धति में PTBP1 के विरुद्ध एक एंटीबॉडी को पॉलिमर नैनोजेल के भीतर रखा जाता है। यह वाहक रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार करता है और एंटीबॉडी कोशिकाओं को PTBP1 नष्ट करने का निर्देश देती है। यह प्रोटीन एस्ट्रोसाइटों को उनकी सहायक भूमिका में बनाए रखने में मदद करता है। प्रयोगशाला में विकसित मानव एस्ट्रोसाइटों और मस्तिष्क ऑर्गेनॉइडों में PTBP1 घटाने से कोशिकाओं ने न्यूरॉनों जैसे गुण हासिल किए, जिनमें अक्षतंतु और समन्वित विद्युत गतिविधि शामिल थे।
लेकिन जीवित पशुओं में इसकी कार्यप्रणाली अब भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि उपचार पाने वाले चूहों में अधिक न्यूरॉन थे, शोधकर्ता अभी यह नहीं दिखा पाए हैं कि वे न्यूरॉन एस्ट्रोसाइटों से बने थे; अन्य तंत्रिका स्टेम कोशिकाओं का भी योगदान हो सकता है। एस्ट्रोसाइट मस्तिष्क के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, इसलिए लंबी अवधि के अध्ययनों में सुरक्षा और यह भी जांचना होगा कि नए न्यूरॉन सही ढंग से मस्तिष्क के तंत्र में जुड़ते हैं या नहीं। टीम की योजना किसी भी मानव परीक्षण से पहले चूहों पर और अध्ययन तथा गैर-मानव प्राइमेटों पर परीक्षण करने की है।