
विज्ञान और खोज
FAST ने खोजी न्यूट्रॉन तारों की अब तक ज्ञात सबसे हल्की जोड़ी
चीन की FAST रेडियो दूरबीन ने अब तक ज्ञात सबसे हल्की द्वि-न्यूट्रॉन तारा प्रणाली की पहचान की है। इससे खगोलविदों को गुरुत्वाकर्षण की जांच और तारों के ढहने से बनने वाले अवशेषों के अध्ययन के लिए एक दुर्लभ नई प्रयोगशाला मिली है। PSR J1856-0039 नाम की इस जोड़ी का कुल द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का 2.488 गुना है और यह हर 2.36 घंटे में एक परिक्रमा पूरी करती है। अपनी तरह की ज्ञात प्रणालियों में इसकी परिक्रमा अवधि दूसरी सबसे छोटी है।
न्यूट्रॉन तारे विशाल तारों के अत्यंत सघन अवशेष होते हैं। अब तक केवल लगभग 30 द्वि-न्यूट्रॉन तारा प्रणालियां खोजी गई हैं। इस प्रणाली में दिखाई देने वाले पल्सर का द्रव्यमान लगभग 1.30 सौर द्रव्यमान है, जबकि उसके साथी का द्रव्यमान लगभग 1.19 सौर द्रव्यमान है। इस कारण साथी तारा अब तक ज्ञात सबसे हल्के न्यूट्रॉन तारों में शामिल है और उसका द्रव्यमान सैद्धांतिक न्यूनतम सीमा के करीब है। यह वैज्ञानिकों को अधिक सटीक ढंग से समझने में मदद कर सकता है कि सुपरनोवा विस्फोट ऐसे अवशेष कैसे बनाते हैं।
अत्यंत सटीक समय-मापन से सामान्य सापेक्षता द्वारा पूर्वानुमानित कई प्रभाव सामने आए, जिनमें कक्षीय पुरस्सरण, गुरुत्वीय लाल विस्थापन, समय-विस्तारण और गुरुत्वीय तरंगों के जरिए ऊर्जा खोने के कारण कक्षा का धीरे-धीरे सिकुड़ना शामिल है। कक्षा के सिकुड़ने की मापी गई दर पूर्वानुमानित मान की 1.009 ± 0.014 गुना थी, जो उससे बहुत निकटता से मेल खाती है।
यह खोज FAST के एक सर्वेक्षण से सामने आई, जिसमें लगभग 900 नए पल्सर मिले हैं। मॉडलों के अनुसार, यह जोड़ी लगभग 8.2 करोड़ वर्षों में विलय करेगी और संभवतः अधिक द्रव्यमान वाला न्यूट्रॉन तारा बनाएगी। लगातार अवलोकन से अत्यधिक घनत्व पर पदार्थ की संरचना के बारे में भी संकेत मिल सकते हैं।