
प्रौद्योगिकी और नवाचार
चीन में विशाल भूमिगत वायु भंडारण परियोजना ने चालू करने का अहम परीक्षण पूरा किया
पूर्वी चीन के चांगझोउ स्थित जिंतान में उस परियोजना की दो इकाइयों ने पूरे तंत्र को चालू करने का परीक्षण पूरा कर लिया है, जिसे सूत्र नमक की भूमिगत गुहाओं में संपीड़ित वायु के जरिए ऊर्जा भंडारण की दुनिया की सबसे बड़ी परियोजना बताते हैं। 12 सितंबर को हुए इस परीक्षण ने उपकरणों के संचालन की स्थिरता की पुष्टि की और इस तकनीक के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया।
मांग कम होने पर यह संयंत्र वायु को वायुमंडलीय दबाव से 130 गुना से अधिक दबाव पर संपीड़ित करके लगभग 1,000 मीटर गहराई में स्थित गुहाओं में भेजता है और इस तरह अतिरिक्त बिजली का भंडारण करता है। संपीड़न के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को जल-आधारित तापीय प्रणाली में संचित किया जाता है। मांग बढ़ने पर वायु को छोड़ा जाता है, दोबारा गर्म किया जाता है और जनरेटर चलाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस चक्र में जीवाश्म ईंधन नहीं जलाया जाता, इसलिए दहन से होने वाले प्रत्यक्ष उत्सर्जन के बिना बिजली पैदा की जा सकती है।
हर चार्जिंग चक्र में 28 लाख किलोवाट-घंटे ऊर्जा का भंडारण किया जा सकता है। संयंत्र को साल में लगभग 330 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके 16 तापीय भंडारण टैंकों में कुल 56,000 घन मीटर पानी रखा जा सकता है।
ये गुहाएं नमक खनन से बनी थीं। इस प्रक्रिया में पानी भूमिगत नमक को घोलता है और उससे बना खारा पानी सतह पर लाया जाता है। नमक की कम पारगम्यता इन स्थानों को दबावयुक्त वायु रखने के लिए उपयुक्त बनाती है। संचालन शुरू होने के बाद परियोजना से बिजली की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, ग्रिड परिवर्तनशील पवन और सौर बिजली उत्पादन का बेहतर उपयोग कर सकेगा।