
विज्ञान और खोज
बेन्नू की आधा ग्राम धूल से उसके प्राचीन जन्मस्थल का संकेत मिला
ETH Zurich के शोधकर्ताओं ने क्षुद्रग्रह बेन्नू से मिली आधा ग्राम सामग्री का इस्तेमाल करके उसके मूल पिंड के संभावित जन्मस्थल की पहचान की है: नवजात सौर मंडल का वह क्षेत्र जहाँ जलवाष्प जमकर बर्फ बनती थी।
यह नमूना उस सामग्री से लिया गया था जिसे NASA का OSIRIS-REx मिशन 2023 में पृथ्वी पर लाया था। टीम ने लौह, टाइटेनियम और क्रोमियम के समस्थानिक कहलाने वाले रूपों को मापा, जिनके द्रव्यमान में थोड़ा अंतर होता है और जो मिलकर एक रासायनिक पहचान बनाते हैं। बेन्नू की यह पहचान क्षुद्रग्रह रयुगू और आदिम, कार्बन-समृद्ध उल्कापिंडों के एक दुर्लभ समूह की पहचान से काफी मिलती है। इससे संकेत मिलता है कि वे धूल के एक ही भंडार से बने थे।
Science Advances में प्रकाशित ये निष्कर्ष उस धारणा को चुनौती देते हैं कि बेन्नू का मूल पिंड अपेक्षाकृत देर से और सौर मंडल के बहुत बाहरी हिस्से में बना था। इसके बजाय शोधकर्ताओं का प्रस्ताव है कि वह लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले जल के बर्फ बनने की सीमा के पास बना, जहाँ भीतरी और बाहरी क्षेत्रों की धूल आपस में मिली और बर्फ ने कणों को बाँधने में मदद की।
उनकी प्रस्तावित व्याख्या में बढ़ते हुए बृहस्पति की भी भूमिका है: हो सकता है कि उसने मोटे कणों वाली सामग्री को रोका हो, जबकि महीन धूल को गुजरने और आपस में मिलने दिया हो। इस प्रक्रिया पर बृहस्पति का कितना प्रभाव पड़ा, यह अब भी अनिश्चित है।
यह छोटा-सा नमूना ग्रहों की मूल सामग्री की झलक देता है। जल और कार्बनिक यौगिकों से समृद्ध बेन्नू की सामग्री यह समझाने में भी मदद कर सकती है कि युवा पृथ्वी को जीवन के आधारभूत घटक कैसे मिले।