
विज्ञान और खोज
वैज्ञानिकों ने 2,000°C से अधिक तापमान पर बर्फ का नया रूप बनाया
शोधकर्ताओं ने सुपरआयनिक बर्फ की एक नई क्रिस्टलीय संरचना तैयार की है और उसकी स्पष्ट पहचान की है। यह पानी की एक असामान्य अवस्था है, जिसके बर्फीले विशाल ग्रहों की गहराइयों में मौजूद होने की संभावना है। सूक्ष्म नमूनों को 230 गीगापास्कल तक के दबाव में रखा गया, जो समुद्र तल पर वायुमंडलीय दबाव का लगभग 23 लाख गुना है, और तापमान 2,630 केल्विन, यानी करीब 2,357 °C तक पहुंचाया गया।
सुपरआयनिक बर्फ सामान्य जमे हुए पानी से बहुत अलग होती है। इसके ऑक्सीजन परमाणु एक कठोर क्रिस्टलीय जालक बनाते हैं, जबकि हाइड्रोजन के नाभिक इस ढांचे के भीतर किसी तरल के कणों की तरह स्वतंत्र रूप से गति करते हैं। इस संयोजन के कारण पदार्थ में ठोस और तरल, दोनों जैसे गुण होते हैं।
टीम ने हीरे की नोकों के बीच पानी को संपीड़ित किया, लेजर से गर्म किया और सिंक्रोट्रॉन एक्स-किरणों की एक संकीर्ण किरण से उसकी परमाणु व्यवस्था की जांच की। लगभग 200 गीगापास्कल से अधिक दबाव पर ऑक्सीजन परमाणुओं ने षट्कोणीय सघन-संकुलित संरचना अपना ली, जो पहले देखे गए फलक-केंद्रित घनीय रूप की तुलना में प्रमुख हो गई। प्रयोगों से यह भी पता चला कि परिस्थितियां बदलने पर दोनों संरचनाएं एक-दूसरे में बदल सकती हैं।
माना जाता है कि यूरेनस और नेपच्यून के भीतर बड़े क्षेत्रों में सुपरआयनिक पानी मौजूद है। चूंकि अलग-अलग क्रिस्टलीय संरचनाओं के विद्युत और यांत्रिक गुण अलग हो सकते हैं, इसलिए यह खोज इन ग्रहों के भीतर पदार्थ और आवेश की गति संबंधी मॉडलों को अधिक सटीक बना सकती है। यह निर्धारित करने के लिए अभी और गणनाएं आवश्यक हैं कि हाल ही में पुष्टि की गई यह अवस्था उनके असामान्य आकार वाले चुंबकीय क्षेत्रों में किस तरह योगदान दे सकती है।
स्रोत
- iXBT.comБолее 2 млн атмосфер и 1500 °C: ученые открыли новую форму горячего льда, который, предположительно, скрыт в недрах Урана и Нептуна
- РБК-УкраинаЛед не тает даже при 2000 °C: физики впервые создали аномальную форму воды
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