
विज्ञान और खोज
छिपी सिलवटों से पता चला, बुध पहले के अनुमान से अधिक सिकुड़ा
वैज्ञानिकों ने बुध के 4.5 अरब वर्ष के इतिहास में उसके सिकुड़ने की मात्रा का पहले से अधिक अनुमान प्रस्तुत किया है। एक नए विश्लेषण के अनुसार ग्रह का व्यास लगभग 23 किलोमीटर घटा हो सकता है, जो सतह के पहले के अध्ययनों से मिले संकेतों की तुलना में काफी अधिक है।
बुध का कभी अत्यंत गर्म रहा आंतरिक भाग ठंडा हुआ तो ग्रह सिकुड़ा और उसकी पर्पटी में सिलवटें पड़ गईं, जिससे लंबी पर्वतीय धारें, कगार और दरारें बनीं। शोधकर्ताओं ने NASA के MESSENGER अंतरिक्ष यान के डेटा से सतह के ऊबड़-खाबड़पन का मानचित्र बनाया। उन्हें अधिक क्रेटरों वाले भूभाग में अपेक्षाकृत समतल क्षेत्रों के मुकाबले सिकुड़न के कम दृश्य चिह्न मिले। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं के टकराने से बना मलबा संभवतः ग्रह की कई ऐसी सिलवटों को दबा चुका है, जो सिकुड़न का संकेत देती हैं।
इन छिपी संरचनाओं को गणना में शामिल करने पर बड़ा अनुमान सामने आया। इसकी पुष्टि होने पर बुध की आंतरिक संरचना के मॉडल बदल सकते हैं। अधिक सिकुड़न बड़े धात्विक क्रोड, उस क्रोड में सिलिकॉन जैसे हल्के तत्वों की कम मात्रा या ग्रह के निर्माण के समय अधिक तापमान का संकेत हो सकती है।
इस अनुमान की अभी जाँच होनी बाकी है। एक स्वतंत्र वैज्ञानिक ने कहा कि इतने बड़े पैमाने की सिकुड़न से पूरे ग्रह पर पर्पटी में सिलवटें पड़ने के अधिक स्पष्ट निशान दिखने की अपेक्षा की जा सकती है। BepiColombo मिशन के नवंबर में बुध के निकट दो ऑर्बिटर स्थापित करने की उम्मीद है। इससे ग्रह की स्थलाकृति का पहला व्यापक वैश्विक मापन और सतह के संघटन, गुरुत्वाकर्षण तथा आंतरिक संरचना के बेहतर आँकड़े मिलेंगे।