
स्वास्थ्य और उपचार
भारत में छह महीने में 80 लाख से अधिक किशोरियों को एचपीवी के टीके लगाए गए
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, छह महीने पहले शुरू हुए राष्ट्रीय अभियान के तहत 80 लाख से अधिक किशोरियों को एचपीवी का टीका लगाया जा चुका है। टीकाकरण का बढ़ता दायरा उन संक्रमणों से सुरक्षा देता है जो गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
28 फरवरी को शुरू हुए इस अभियान में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर माता-पिता की सहमति से 14 वर्षीय लड़कियों को स्वैच्छिक रूप से निःशुल्क, एक खुराक वाला टीका दिया जाता है। भारत में हर साल लगभग 1.2 करोड़ लड़कियां इसके लिए पात्र होती हैं। इस लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, हालांकि अभी और लड़कियों तक पहुंचना बाकी है।
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक, 22 लाख से ज्यादा टीके लगाए गए। मंत्रालय ने बताया कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मिजोरम अपने चिह्नित लक्षित समूहों के सभी सदस्यों तक पहुंच चुके हैं, जबकि बिहार, आंध्र प्रदेश और असम में टीकाकरण कवरेज 90% से अधिक हो गया है।
स्वास्थ्य टीमों ने माता-पिता, शिक्षकों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के सहयोग से शहरी, ग्रामीण और दूरदराज के समुदायों में काम किया है। U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म कार्यक्रम प्रबंधकों को जिलों में टीकाकरण कवरेज पर नजर रखने और छूट गई लड़कियों की पहचान करने में मदद करता है। टीकाकरण प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में होता है और स्वास्थ्य केंद्र दुर्लभ प्रतिकूल घटनाओं के आकलन के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध सेवाओं से जुड़े हैं।
यह कार्यक्रम एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए है। भारत में हर साल गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के 1.2 लाख से अधिक नए मामले दर्ज होते हैं। एचपीवी टीकाकरण और नियमित जांच से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है, और समय पर पहचान तथा उपचार होने पर इसे ठीक किया जा सकता है।