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भारत ने 51 लाख और कर्मचारियों तक बढ़ाया सेवानिवृत्ति सुरक्षा का दायरा
भारत ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी है, जिससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य कार्यस्थल सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2014 के बाद इस सीमा में पहले बदलाव को मंजूरी दी है। इससे ऐसे अनेक कर्मचारी स्वतः सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे, जिनका वेतन पुरानी सीमा से ऊपर पहुंच गया था।
इसके दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों में काम करने वाले और नई शामिल की गई ₹15,000 से ₹25,000 की वेतन श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को योजना के नियमों के अधीन भविष्य निधि बचत, पेंशन लाभ और निधि की सदस्यता से जुड़े बीमा का लाभ मिलेगा। संशोधित सीमा के तहत कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ₹25,000 तक के वेतन का 12 प्रतिशत योगदान देंगे। केंद्र सरकार पेंशन के लिए 1.16 प्रतिशत का योगदान जारी रखेगी।
यह बदलाव दर्शाता है कि 12 वर्ष पहले सीमा तय किए जाने के बाद से वेतन और जीवनयापन की लागत कितनी बढ़ चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नियमित वेतनभोगी कर्मचारी का औसत वेतन लगभग ₹23,000 है, जबकि कई राज्यों में न्यूनतम वेतन पुरानी सीमा से ऊपर जा चुका है।
इस व्यापक सुरक्षा कवच के साथ निकट अवधि में कुछ लागत भी जुड़ी है: प्रभावित कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन घट सकता है, क्योंकि अधिक राशि भविष्य निधि बचत में जाएगी, जबकि नियोक्ताओं का योगदान बढ़ेगा। सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था के लिए वार्षिक सहायता ₹1,089 करोड़ बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगी। भारत के EPFO में पहले से ही 7,68,000 प्रतिष्ठानों के लगभग 7.98 करोड़ योगदान देने वाले सदस्य हैं।