
प्रौद्योगिकी और नवाचार
भारत ने खुली हवा में 5.56 किलोमीटर तक क्वांटम-सुरक्षित लिंक का परीक्षण किया
भारतीय शोधकर्ताओं ने परीक्षण संदेशों को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने में मदद के लिए खुली हवा में 5.56 किलोमीटर लंबे क्वांटम लिंक का इस्तेमाल किया है। यह दूरी 2025 में भारत में हुए इसी तरह के परीक्षण की दूरी से पांच गुने से अधिक है।
यह प्रदर्शन 27–28 सितंबर की रात आईआईटी गांधीनगर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संस्थान BISAG-N के बीच हुआ। इसमें बेंगलुरु स्थित QNu Labs के उपकरण इस्तेमाल किए गए।
क्वांटम कुंजी वितरण नामक यह तकनीक साझा एन्क्रिप्शन कुंजियां स्थापित करने के लिए प्रकाश के कणों का इस्तेमाल करती है। इन कणों को बीच में पकड़ने और मापने के प्रयास त्रुटियां पैदा करते हैं, जिनका पता प्रेषक और प्राप्तकर्ता लगा सकते हैं। फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए प्रकाश भेजने वाली प्रणालियों के विपरीत, इस लिंक ने उसे सीधे वायुमंडल के माध्यम से भेजा।
इसके लिए प्रेषक और प्राप्तकर्ता उपकरणों का सटीक संरेखण जरूरी होता है, साथ ही वायुमंडलीय अशांति और प्रकाश प्रदूषण के अनुसार समायोजन भी करने होते हैं। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण में गलत तरीके से प्राप्त क्वांटम बिट्स का अनुपात 5% से नीचे रहा, जो एक वांछनीय स्तर है।
टीम ने क्वांटम लिंक को सॉफ्टवेयर आधारित एन्क्रिप्शन के साथ भी जोड़ा, जिसे पारंपरिक और क्वांटम, दोनों तरह के कंप्यूटरों के हमलों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है। दोनों प्रणालियों ने मिलकर प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक परीक्षण संदेशों को सफलतापूर्वक सुरक्षित रखा।
यह जमीन पर किया गया प्रदर्शन था, उपग्रह कनेक्शन नहीं। लेकिन खुली हवा में विश्वसनीय संचरण का परीक्षण उपग्रहों और जमीनी स्टेशनों के बीच लिंक स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का दीर्घकालिक लक्ष्य है।