
विज्ञान और खोज
भारत की चट्टान ने सूक्ष्मजीवी जीवन के संकेतों को 3.5 अरब वर्ष की आयु से जोड़ा
पूर्वी भारत की काली-सफेद पट्टियों वाली एक चट्टान ने सूक्ष्मजीवी जीवन के संकेतों और लगभग 3.497 अरब वर्ष की रेडियोमेट्रिक आयु के बीच असाधारण रूप से मजबूत संबंध स्थापित किया है। समकक्ष-समीक्षित पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित कई रासायनिक और संरचनात्मक सुरागों के आधार पर शोधकर्ता इसे जीवन के पुष्ट संकेत वाली सबसे पुरानी चट्टान बताते हैं, जिसकी आयु प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित की गई है।
यह चर्ट सिंहभूम क्रेटन के भीतरदारी से मिला था। सिंहभूम क्रेटन महाद्वीपीय भूपर्पटी का एक प्राचीन भूखंड है, जो झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में फैला है। चट्टान में कार्बन-समृद्ध पदार्थ और सिलिका की बारी-बारी से बनी अत्यंत महीन परतें बार-बार दिखाई देती हैं। यह संरचना सूक्ष्मजीवों की चटाईनुमा परत के अवशेषों के अनुरूप है।
चूंकि चर्ट की आयु सीधे निर्धारित नहीं की जा सकती, इसलिए टीम ने उसकी परतों के बीच मौजूद आठ जिरकॉन क्रिस्टलों की जांच की। इनमें से चार की यूरेनियम-सीसा आधारित आयु लगभग 3.5 अरब वर्ष पाई गई, जो एक-दूसरे से मेल खाती थी। उनके छोटे, सुई जैसे आकार संकेत देते हैं कि वे चट्टान के निर्माण के दौरान ताजा ज्वालामुखीय राख के रूप में वहां पहुंचे थे, न कि पुराने पदार्थ के अपरदन से आए थे।
रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी से संकेत मिला कि परतों में मौजूद कार्बन मूल रूप से चट्टान का ही हिस्सा था और दरारों में बाद में जमा हुए ग्रेफाइट से अलग बना रहा। उसके कार्बन समस्थानिकों का अनुपात भी जैविक कार्बन स्थिरीकरण की विशेषताओं के अनुरूप था।
अकेले कोई भी सुराग पर्याप्त नहीं होगा, और सूक्ष्मजीवों के चयापचय संबंधी व्याख्याओं की पुष्टि के लिए आगे शोध आवश्यक है। लेकिन संयुक्त रूप से ये साक्ष्य प्रारंभिक पृथ्वी पर स्थापित सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्रों का ऐसा अभिलेख प्रदान करते हैं, जिसकी आयु विशेष रूप से अच्छी तरह निर्धारित की गई है।