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भारत की जन धन बैंकिंग योजना में खातों की संख्या 59.09 करोड़ पहुंची
भारत की प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना के तहत अब 59.09 करोड़ बैंक खाते हैं, जो 2015 में दर्ज 14.72 करोड़ खातों के लगभग चार गुना हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना की 12वीं वर्षगांठ से पहले जारी सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि इसी अवधि में जमा राशि लगभग बीस गुना बढ़कर ₹15,670 करोड़ से ₹3.165 लाख करोड़ हो गई।
इन खातों का बड़ा हिस्सा उन समूहों के पास है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से औपचारिक बैंकिंग तक पहुंचने में अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ा है। 19 अगस्त 2026 तक 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में थे, जबकि 32.92 करोड़ खाते महिलाओं के पास थे। औसत जमा राशि ₹5,356 तक पहुंच गई थी, जो 12 वर्ष पहले के स्तर का लगभग 3.4 गुना है। चूंकि इन खातों में न्यूनतम शेष रखने की जरूरत नहीं होती, बढ़ती जमा राशि संकेत देती है कि कई खातों का इस्तेमाल बचत रखने के लिए हो रहा है, न कि उन्हें केवल खोलकर खाली छोड़ दिया गया है।
2014 में शुरू हुई और 2018 में हर बैंकिंग सुविधा से वंचित वयस्क तक पहुंचने के लिए विस्तारित जन धन योजना न्यूनतम शेष या रखरखाव शुल्क के बिना बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं देती है। इन खातों में सरकारी लाभ सीधे प्राप्त किए जा सकते हैं और पात्र खाताधारकों को ओवरड्राफ्ट, बीमा, पेंशन तथा अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ा जा सकता है। योजना के तहत 41.29 करोड़ RuPay डेबिट कार्ड भी जारी किए गए हैं, जिससे एटीएम और डिजिटल भुगतान तक पहुंच बढ़ी है।