
स्वास्थ्य और उपचार
भारत में एक दशक में मलेरिया के मामलों और मौतों में लगभग 80% की गिरावट
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, भारत में 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों, दोनों में लगभग 80% की कमी आई। इसी अवधि में अधिक रोगभार वाले जिलों की संख्या 155 से घटकर 33 रह गई।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2022 से 2025 के दौरान 160 जिलों में स्थानीय रूप से उत्पन्न मलेरिया का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। यह संकेत है कि इन क्षेत्रों में स्थानीय संचरण रुक गया था। शेष रोगभार अब कुछ क्षेत्रों में अधिक केंद्रित होता जा रहा है: 2025 में नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 33 जिलों में भारत के मलेरिया के 64% मामले और इससे हुई 54% मौतें दर्ज हुईं।
भारत के 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में अधिकारी अब स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप जिला और ग्राम कार्ययोजनाओं पर ध्यान दे रहे हैं। मंत्रालय ने अपनी “जांच, उपचार और अनुवर्तन” रणनीति के तहत सक्रिय निगरानी, शीघ्र निदान और पूरा उपचार सुनिश्चित करने के प्रयासों को मज़बूत करने का आह्वान किया। साथ ही, दुर्गम क्षेत्रों और संवेदनशील समुदायों में जांच सेवाओं तथा मलेरिया-रोधी दवाओं की भरोसेमंद उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
समीक्षा में राज्यों से डेटा की गुणवत्ता सुधारने और स्थानीय सरकारी निकायों, सामुदायिक स्वयंसेवकों तथा स्वयं सहायता समूहों के साथ समन्वय करने का भी आग्रह किया गया। इनकी भूमिकाओं में बुखार की जल्दी सूचना देना, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करना और जलभराव दूर करना शामिल है। अधिकारियों ने आगाह किया कि जिन क्षेत्रों में संचरण रुक गया है, वहां मलेरिया की वापसी रोकने के लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक होगी।