
प्रौद्योगिकी और नवाचार
भारत के UPI ने 241 अरब से अधिक सालाना लेनदेन के साथ 10 वर्ष पूरे किए
भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने अपना पहला दशक पूरा कर लिया है। सीमित बैंकिंग पायलट परियोजना से शुरू होकर यह देश का प्रमुख डिजिटल भुगतान नेटवर्क बन गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जो 241.62 अरब के बराबर हैं। वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 1.78 करोड़, यानी 17.8 मिलियन था। यह लगभग 13,000 गुना वृद्धि है।
इसी अवधि में लेनदेन का मूल्य ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गया, यानी 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई। अकेले जुलाई 2026 में इस प्रणाली से जुड़े 741 बैंकों ने ₹29.87 लाख करोड़ के 2,365.8 करोड़ लेनदेन संसाधित किए।
भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा विकसित UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में 21 बैंकों की पायलट परियोजना के रूप में हुई और उसी वर्ष अगस्त में इसे आम जनता के लिए शुरू किया गया। इसकी परस्पर संगत संरचना लोगों को एक ही मोबाइल ऐप से बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण और व्यापारियों को भुगतान करने की सुविधा देती है। बाद में जोड़ी गई सुविधाओं ने इसकी पहुंच बढ़ाई, जिनमें फीचर फोन के लिए UPI 123PAY, आवर्ती भुगतान के विकल्प और छोटे लेनदेन के साधन शामिल हैं।
UPI अब 11 विदेशी देशों में भी भुगतान स्वीकार करने, सीमापार धन भेजने या दोनों के लिए उपलब्ध है। ग्रीस और मालदीव के साथ जुड़ी भुगतान व्यवस्थाएं 2026 में चालू हुईं, जिससे नेटवर्क की पहुंच भारत से बाहर और बढ़ी।