
स्वास्थ्य और उपचार
जापान ने ग्रासनली के कैंसर के लिए दुनिया की पहली वायरस-आधारित चिकित्सा शुरू की
जून में स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद जापान ने Telomelysin की बिक्री शुरू कर दी है। इसे ग्रासनली के कैंसर के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध दुनिया की पहली वायरस-आधारित चिकित्सा बताया गया है। यह उपचार उन लोगों के लिए नया विकल्प देता है जो रोग को ठीक करने वाली सर्जरी या मानक कीमोरेडियोथेरेपी नहीं करा सकते। बिक्री 21 अगस्त को शुरू हुई।
यह दवा आनुवंशिक रूप से संशोधित एडेनोवायरस का उपयोग करती है, जो ऐसे वायरस परिवार का हिस्सा है जिससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसे उन कैंसर कोशिकाओं के भीतर अपनी संख्या बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है जिनमें टेलोमेरेज़ एंजाइम सक्रिय होता है। इससे वे कोशिकाएं नष्ट होती हैं, जबकि सामान्य ऊतकों को होने वाला नुकसान सीमित रहता है। विकिरण उपचार के साथ इसका इस्तेमाल किया जाता है और मुंह के रास्ते डाले गए एंडोस्कोप से इसे दो-दो सप्ताह के अंतराल पर तीन बार सीधे ट्यूमर में इंजेक्ट किया जाता है। इससे चीरा लगाने वाली सर्जरी से बचा जा सकता है और अस्पताल में भर्ती हुए बिना उपचार संभव हो सकता है।
ओकायामा विश्वविद्यालय में 36 लोगों पर हुए चिकित्सकीय परीक्षण में उपचार के 18 महीने बाद 18 मरीजों में स्थानीय कैंसर का पता नहीं चला। यह चिकित्सा हर मरीज पर असर नहीं करती और संभावित दुष्प्रभावों में बुखार तथा लिम्फोसाइट की संख्या में अस्थायी कमी शामिल हैं।
दवा की लागत प्रति मरीज लगभग 93 लाख येन है, हालांकि जापान की उच्च चिकित्सा व्यय सहायता व्यवस्था मरीजों के व्यक्तिगत भुगतान को सीमित कर सकती है। विश्वविद्यालय से स्थापित इसकी विकासकर्ता कंपनी मलाशय और स्वरयंत्र के ट्यूमर सहित अन्य कैंसरों के खिलाफ भी इसकी संभावनाएं तलाशना चाहती है।