
विज्ञान और खोज
मंगल का विशाल बादल धूल के बिना भी बन सकता है
वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन में मंगल के एक विशाल बादल की प्रमुख विशेषताओं को दोहराया है और उसके बनने की नई व्याख्या दी है: जलवाष्प पहले धूल पर जमा हुए बिना ही जमकर बर्फ बन सकती है।
जल-बर्फ का यह बादल आर्सिया मॉन्स ज्वालामुखी से हवा की बहने की दिशा में 1,800 किलोमीटर तक फैला होता है। यह मंगल के दक्षिणी गोलार्ध में वसंत और गर्मियों के दौरान हर सुबह दिखाई देता है, फिर छंट जाता है। यह चक्र महीनों तक दोहराता रहता है।
Nature Geoscience में प्रकाशित अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अपने मॉडल तैयार करने में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Mars Express अंतरिक्ष यान की तस्वीरों का इस्तेमाल किया। आम तौर पर बादलों की बूंदें या बर्फ के क्रिस्टल हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों की मदद से बनते हैं। इन कणों के बिना होने वाली प्रक्रिया जोड़ने पर टीम का मॉडल बादल को कहीं अधिक सटीकता से दोहरा सका।
मॉडल में ज्वालामुखी के पास से गुजरती हवाएं एक शक्तिशाली तरंग पैदा करती हैं, जो नम हवा को कुछ ही मिनटों में कई किलोमीटर ऊपर उठा देती है। तेजी से ठंडा होने से ऐसी परिस्थितियां बनती हैं जिनमें जलवाष्प सीधे जमकर बर्फ के कण बन सकती है।
मॉडल हर विवरण से मेल नहीं खाता, और इस व्याख्या की पुष्टि के लिए और अवलोकनों की जरूरत होगी। फिलहाल, यह उस पहेली का एक आशाजनक उत्तर देता है जिसे पहले के सिमुलेशन हल नहीं कर पाए थे।