
विज्ञान और खोज
मस्तिष्क का नया एटलस दिखाता है कि अलग-अलग कोशिकाओं पर उम्र का असर कैसे भिन्न होता है
वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में जीन की सक्रियता का अब तक का सबसे बड़ा मानचित्र तैयार किया है। मस्तिष्क का यह हिस्सा योजना बनाने, ध्यान केंद्रित करने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। दान किए गए लगभग 1,500 मस्तिष्कों की 63 लाख से अधिक कोशिकाओं पर आधारित यह कार्य उम्र बढ़ने और मस्तिष्क संबंधी विकारों के अध्ययन के लिए एक विस्तृत संदर्भ उपलब्ध कराता है।
PsychAD Consortium के नेतृत्व वाली इस परियोजना में अल्ज़ाइमर रोग और कई अन्य तंत्रिका संबंधी या मनोरोग स्थितियों वाले दाताओं के साथ-साथ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें ये विकार नहीं थे। इन सभी समूहों में मस्तिष्क के एक ही हिस्से का अध्ययन करने से अधिक सुसंगत तुलना संभव होती है।
शैशवावस्था से लेकर 97 वर्ष की उम्र तक के स्वस्थ मस्तिष्कों पर किए गए एक संबद्ध अध्ययन में जीवन के शुरुआती दौर में व्यापक बदलाव, वयस्क अवस्था में अपेक्षाकृत स्थिरता और लगभग 65 वर्ष की उम्र से फिर बदलाव दिखाई दिए। शुरुआती बदलाव विशेष रूप से संदेश पहुंचाने वाली न्यूरॉन कोशिकाओं में स्पष्ट थे। जीवन के बाद के दौर में कई सबसे प्रमुख बदलाव ग्लिया नामक सहायक कोशिकाओं में दिखाई दिए। इनमें प्रतिरक्षा गतिविधि और कोशिकीय तनाव के प्रति प्रतिक्रियाओं में बदलाव शामिल थे।
नतीजे बताते हैं कि मस्तिष्क पर उम्र का असर एक समान प्रक्रिया नहीं है: अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएं अलग-अलग जैविक समयक्रम का पालन करती हैं। ये निष्कर्ष शोधकर्ताओं का ध्यान न्यूरॉन्स से आगे उन कोशिकाओं की ओर भी ले जाते हैं जो उनकी रक्षा करने और उन्हें जीवित व कार्यशील बनाए रखने में मदद करती हैं।
यह एटलस शोध का संसाधन है, उपचार नहीं। इसमें मस्तिष्क का केवल एक क्षेत्र शामिल है, इसलिए व्यापक तस्वीर को समझने के लिए और मानचित्रण की आवश्यकता होगी।