
प्रौद्योगिकी और नवाचार
नाभिकीय घड़ियां समय मापने के लिए परमाणु के नाभिक का उपयोग करती हैं
वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने परमाणु नाभिक के भीतर ऊर्जा में होने वाले बदलावों से समय मापने वाली कार्यशील नाभिकीय घड़ियां बनाई हैं। ये प्रोटोटाइप अभी सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों से बेहतर नहीं हैं, लेकिन उस तकनीक की व्यवहार्यता दिखाते हैं जिसे विकसित करने के लिए भौतिक विज्ञानी लगभग 50 वर्षों से प्रयास कर रहे हैं।
Nature पत्रिका में वर्णित दोनों उपकरण लेजर और क्रिस्टलों में समाहित थोरियम के एक रूप, थोरियम-229, का उपयोग करते हैं। पारंपरिक परमाणु घड़ियां इलेक्ट्रॉनों से जुड़े ऊर्जा परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं। इसके विपरीत, नाभिकीय घड़ियां परमाणु के नाभिक में होने वाले बदलावों का उपयोग करती हैं, जो बाहरी व्यवधानों से कम प्रभावित होता है। यहां “नाभिकीय” शब्द समय मापने की प्रणाली को दर्शाता है, न कि विखंडन या संलयन पर आधारित ऊर्जा स्रोत को।
वियना की घड़ी बिना किसी हस्तक्षेप के 24 घंटे से अधिक समय तक स्थिर रही। इसकी मापी गई परिशुद्धता लगभग तीन करोड़ वर्षों में एक सेकंड की त्रुटि के बराबर है। तुलना के लिए, सर्वश्रेष्ठ पारंपरिक परमाणु घड़ियां अरबों वर्षों में केवल एक सेकंड आगे या पीछे होंगी।
इस तकनीक की संभावनाएं समय बताने से कहीं आगे जाती हैं। डार्क मैटर की खोज के एक प्रयोग में वियना के उपकरण ने सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों के स्तर का प्रदर्शन किया, हालांकि उसे डार्क मैटर नहीं मिला। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि बेहतर संस्करण मूलभूत भौतिकी के अधिक सटीक परीक्षण संभव बनाएंगे। दोनों टीमों की खूबियां भी एक-दूसरे की पूरक हैं: वियना के थोरियम क्रिस्टलों के प्रकाशीय गुण बेहतर हैं और उनमें थोरियम की सांद्रता अधिक है, जबकि बीजिंग का लेजर अधिक शक्तिशाली है। इससे प्रदर्शन सुधारने का एक व्यावहारिक रास्ता दिखाई देता है।