
फलती-फूलती प्रकृति
कभी एक द्वीप तक सिमट गया था न्यूज़ीलैंड का विशाल कीट, अब बढ़ रही है आबादी
न्यूज़ीलैंड के सबसे भारी कीट वेटापुंगा के 11,000 से अधिक जीवों को 2010 से नियंत्रित परिस्थितियों में प्रजनन कराकर 10 नए स्थलों पर छोड़ा गया है। मोटुओरा और तिरितिरि मातांगी द्वीपों पर निगरानी से संकेत मिलता है कि अब कम से कम चार पीढ़ियां प्राकृतिक परिवेश में जन्म ले चुकी हैं।
झींगुरों और टिड्डों से संबंधित यह विशाल, उड़ानहीन कीट कभी नॉर्थ आइलैंड के कुछ हिस्सों में पाया जाता था। लेकिन बाहर से लाए गए शिकारी जीवों और जंगलों की कटाई के कारण यह केवल ते हाउतुरु-ओ-तोई, यानी लिटिल बैरियर आइलैंड पर बचा रह गया। 2004 में वहां से चूहों को हटाए जाने के बाद भी सर्वेक्षणों में इतने कम कीट मिले कि बड़े पैमाने पर उन्हें अन्य स्थानों पर बसाना संभव नहीं था।
इसके बजाय संरक्षणकर्ताओं ने छोटे समूह इकट्ठा किए और बटरफ्लाई क्रीक वन्यजीव पार्क तथा ऑकलैंड चिड़ियाघर में प्रजनन समूह स्थापित किए। देखभाल करने वालों ने अपने तरीके बेहतर किए और अंततः छोटे कीटों को जालीदार पिंजरों में एक साथ पालने लगे। सबसे अनुकूल परिस्थितियों में 80% तक कीट छोड़े जाने तक जीवित रहे।
यह कार्यक्रम शिकारी जीवों से मुक्त आठ द्वीपों और मुख्यभूमि पर बाड़ से घिरे दो अभयारण्यों तक पहुंचा। इसमें प्रजाति के माओरी संरक्षक नगाती मानुहिरी और सामुदायिक पुनर्बहाली समूहों का सहयोग मिला। इसके परिणाम New Zealand Journal of Zoology में दर्ज हैं।
वेटापुंगा अब भी संकटग्रस्त है और संरक्षण कार्यों पर निर्भर है, लेकिन 2022 में इसका राष्ट्रीय वर्गीकरण ‘राष्ट्रीय स्तर पर लुप्तप्राय’ से बदलकर ‘संकटग्रस्त—राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती आबादी’ कर दिया गया। प्रगति का सबसे मजबूत प्रमाण केवल छोड़े गए कीटों की संख्या नहीं, बल्कि नए ठिकानों में जीवित रहने और प्रजनन करने वाली उनकी पीढ़ियां हैं।