
प्रौद्योगिकी और नवाचार
एक ही मस्तिष्क इम्प्लांट बोलने और इशारे करने की मंशा को एक साथ समझता है
एक ही मस्तिष्क इम्प्लांट ने बोलने और इशारे करने की मंशा को एक साथ अभिव्यक्ति में बदला है, जिससे गंभीर पक्षाघात से प्रभावित दो लोग कुछ ही सेकंड में अपने लिए तैयार किए गए एनिमेटेड अवतार के जरिए संवाद कर सके।
अवधारणा की व्यवहार्यता साबित करने वाली यह प्रणाली मस्तिष्क के सेंसरिमोटर कॉर्टेक्स की सतह पर लगाए गए 253 इलेक्ट्रोड का उपयोग करती है। मस्तिष्क का यह हिस्सा बोलने और शरीर की गतिविधियों से जुड़ा है। विशेष रूप से तैयार मशीन-लर्निंग मॉडल विद्युत गतिविधि को समझकर उसे स्क्रीन पर पाठ में बदलते हैं और साथ ही अवतार को हाथ हिलाने, सिर हिलाने, कंधे उचकाने या अन्य इशारे करने का संकेत देते हैं।
एक प्रतिभागी की बोलने और शरीर को हिलाने-डुलाने की क्षमता ब्रेनस्टेम में स्ट्रोक के बाद प्रभावित हुई थी। दूसरे को एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस था, जो मोटर न्यूरॉन की ऐसी बीमारी है जिसने धीरे-धीरे उनकी बोलने और शरीर को हिलाने-डुलाने की क्षमता को प्रभावित किया था। परीक्षण के दौरान उन्होंने वाक्यांश बोलने और इशारे करने की कोशिश की या उनकी कल्पना की—अलग-अलग भी और साथ-साथ भी, जैसे हाथ हिलाते हुए “नमस्ते” कहना।
पहले प्रतिभागी के मामले में प्रणाली ने इच्छित इशारों को 88% और इच्छित वाणी को 84% सटीकता से पहचाना। दूसरे के लिए ये परिणाम क्रमशः 66% और 70% रहे, जबकि संयोग के आधार पर लगभग 9% सटीकता अपेक्षित थी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन शुरुआती कदम है, रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए तैयार उपकरण नहीं। इसमें केवल दो लोग और वाक्यांशों व इशारों का सीमित चयन शामिल था, और सटीकता में सुधार आवश्यक है। फिर भी, अभिव्यक्ति के इन दोनों रूपों को एक साथ समझना भविष्य में सहायक तकनीक के जरिए संवाद को अधिक स्वाभाविक बना सकता है और उसमें भावों की बारीकियाँ बेहतर ढंग से व्यक्त हो सकती हैं।