
स्वास्थ्य और उपचार
500 मरीज़ों के परीक्षण में अग्न्याशय कैंसर की दवा से जीवित रहने की अवधि बढ़ी
मुंह से ली जाने वाली एक दवा ने 500 ऐसे मरीज़ों पर किए गए परीक्षण में जीवित रहने की अवधि बढ़ाई, जिनका अग्न्याशय कैंसर फैल चुका था और पिछले उपचार के बाद और बिगड़ गया था। डारैक्सोनरासिब लेने वालों में जीवित रहने की माध्यिका अवधि 12.4 महीने रही, जबकि कीमोथेरेपी लेने वालों में यह 6.7 महीने थी। बीमारी के और बिगड़े बिना बीतने वाली माध्यिका अवधि भी अधिक रही: 3.6 महीने के मुकाबले 7.2 महीने।
इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर यूरोपीय औषधि एजेंसी ने Rasonque नाम की इस दवा को उन वयस्कों के लिए अधिकृत करने की सिफारिश की है, जिनका अग्न्याशय का एडेनोकार्सिनोमा दूसरे अंगों तक फैल चुका है और जो पहले कम से कम एक उपचार ले चुके हैं। ऐसे मरीज़ों के लिए उपचार के विकल्प सीमित रहे हैं।
डारैक्सोनरासिब RAS नामक प्रोटीनों को अवरुद्ध करती है, जो कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। उत्परिवर्तनों के कारण ये प्रोटीन लगातार सक्रिय रह सकते हैं, जिससे ट्यूमर को बढ़ने में मदद मिलती है। यह दवा किसी एक विशिष्ट उत्परिवर्तन के बजाय RAS के कई रूपों को निशाना बनाती है।
यह बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं करती और इसके दुष्प्रभाव अब भी बड़ी चिंता हैं। आम समस्याओं में दस्त, त्वचा पर चकत्ते और मुंह के भीतर सूजन शामिल थे। दवा लेने वाले 61.8% मरीज़ों में गंभीर दुष्प्रभाव हुए, जबकि कीमोथेरेपी लेने वालों में यह अनुपात 69.6% था।
दवा को अमेरिका में पहले ही मंज़ूरी मिल चुकी है, लेकिन यूरोप में इसकी उपलब्धता अभी सुनिश्चित नहीं है। यूरोपीय आयोग को अभी इसके विपणन की मंज़ूरी देनी है, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर कीमत और वित्तपोषण के फैसले होंगे। यह सिफारिश जीवित रहने की अवधि बढ़ाने का प्रमाणित लाभ देने वाले उपचार को अधिक मरीज़ों तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है।