
प्रौद्योगिकी और नवाचार
सिंगापुर की परमाणु घड़ी ने सटीकता का नया रिकॉर्ड बनाया
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के शोधकर्ताओं ने एक परमाणु घड़ी बनाई है, जिसकी बताई गई सटीकता इतनी है कि 260 अरब वर्षों में भी यह एक सेकंड से कम पीछे होगी। दुर्लभ मृदा धातु ल्यूटेशियम पर आधारित प्रयोगशाला का यह उपकरण पिछली सबसे सटीक घड़ी से चार गुना अधिक सटीक है।
इसका प्रदर्शन परखने के लिए टीम ने 200 घंटों तक माप लेकर ल्यूटेशियम की दो घड़ियों की तुलना की। दोनों की टिक की दर 19वें अंक तक मेल खाती थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अब तक की सबसे सटीक घड़ी-तुलना है। यह मेल उनके सटीकता संबंधी अनुमानों की एक महत्वपूर्ण जाँच है।
हर घड़ी में ल्यूटेशियम का एक विद्युत-आवेशित परमाणु इस्तेमाल होता है। लेज़र को उस आवृत्ति पर समायोजित किया जाता है, जिससे परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन अपना ऊर्जा स्तर बदलता है। प्रकाश के दोलन ही घड़ी की टिक का आधार बनते हैं।
परमाणु घड़ियों में इस्तेमाल होने वाली कुछ अन्य सामग्रियों की तुलना में ल्यूटेशियम पर तापमान और चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव का बहुत कम असर पड़ता है। यह उपकरण कमरे के तापमान पर भी काम करता है और इसमें व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लेज़र तकनीक इस्तेमाल होती है।
यह उपलब्धि एक दशक से अधिक के काम का परिणाम है। इतनी सटीकता पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में बदलाव के माप को बेहतर बना सकती है और भविष्य में सेकंड की परिभाषा नए सिरे से तय करने का आधार बन सकती है। टीम घड़ी को छोटा करने और अंततः प्रयोगशाला के बाहर इस्तेमाल करने की भी उम्मीद रखती है।