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दक्षिण कोरिया की सर्वोच्च अदालत ने फिल्मों में कैप्शन और ऑडियो विवरण की कमी को भेदभाव माना
दक्षिण कोरिया की सर्वोच्च अदालत ने पुष्टि की है कि तीन प्रमुख सिनेमाघर संचालकों ने ऑडियो विवरण, कैप्शन और इन्हें प्राप्त करने वाले उपकरण उपलब्ध न कराकर दृष्टिहीन और बधिर दर्शकों के साथ भेदभाव किया। चार वादियों के 2016 में मुकदमा दायर करने के एक दशक बाद आए इस फैसले ने फिल्मों तक पहुंच को ऐसा अधिकार माना है जो केवल सांस्कृतिक जीवन से ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विकास, सामाजिक भागीदारी और समावेशन से भी जुड़ा है।
अदालत ने सियोल उच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए उपाय को खारिज कर दिया। उस उपाय के तहत आम तौर पर 300 सीटों की न्यूनतम सीमा पूरी करने वाले सिनेमाघरों में केवल 3% प्रदर्शनों को सुगम बनाने का प्रावधान था। सर्वोच्च अदालत ने पाया कि प्रदर्शनों की संख्या और शामिल सिनेमाघरों, दोनों पर सीमाएं लगाकर इस दृष्टिकोण ने संचालकों की लागत को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया। मामला अब निचली अदालत में लौटेगा, जो अधिक व्यापक और बेहतर संतुलित उपाय तय करेगी। इसमें दिव्यांग लोगों की समान पहुंच, संचालकों की आर्थिक स्वतंत्रता और सार्थक पहुंच को कमजोर किए बिना लागत नियंत्रित करने के तरीकों पर विचार किया जाएगा।
फैसले की प्रस्तुति ने भी बेहतर सुगम्यता का उदाहरण पेश किया। सर्वोच्च अदालत ने पहली बार संक्षिप्त, सरल भाषा और दृश्य सामग्री वाला आसानी से पढ़ा जा सकने वाला संस्करण उपलब्ध कराया। फैसला सुनाए जाने के दौरान मौखिक टिप्पणियां कैप्शन के रूप में दिखाई गईं और सांकेतिक भाषा में अनुवाद के माध्यम से भी प्रस्तुत की गईं। सिनेमाघरों के दायित्वों का अंतिम दायरा अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन भेदभाव का निष्कर्ष अब बरकरार है और सीमित 3% ढांचे पर पुनर्विचार करना होगा।