
फलती-फूलती प्रकृति
ताइवान ने नानझुआंग संतरे के पेटेंट को साइसियात समुदाय के साथ लाभ-साझेदारी से जोड़ा
ताइवान की मियाओली काउंटी में नानझुआंग संतरे के 5,000 से अधिक पेड़ फिर लगाए गए हैं। इसी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले इस खट्टे फल के जंगली पेड़ों की संख्या कभी घटकर पांच से भी कम रह गई थी। 9 सितंबर को ताइवान की वानिकी एवं प्रकृति संरक्षण एजेंसी और साइसियात समुदाय की एक सहकारी संस्था ने इस फल से बने उत्पादों से जुड़े पेटेंट का लाइसेंस देने के लिए एक आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए। एजेंसी इसे किसी आदिवासी फसल और उससे जुड़े उत्पादों के लिए ताइवान का पहला पेटेंट संरक्षण मामला बताती है।
प्रजाति को पुनर्स्थापित करने का काम 2019 में शुरू हुआ, जिसका आधार नानझुआंग में एजेंसी और साइसियात समुदाय के बीच वनों का संयुक्त प्रबंधन था। बीज एकत्र किए गए, पौध तैयार की गई और पेड़ों को उनके मूल क्षेत्र में वापस लगाया गया। पहाड़ी तलहटी में विकास से खतरे में पड़ी इस प्रजाति को लंबे समय तक कम आर्थिक मूल्य वाला माना गया। IUCN ने इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया है। पुनर्स्थापन धीरे-धीरे हो रहा है: लगाए गए पेड़ों में आधे से भी कम नियमित रूप से फल देते हैं और पौधों को फल देने में लगभग पांच से छह वर्ष लगते हैं।
साइसियात समुदाय के लिए यह भोजन और स्वास्थ्य संबंधी उपयोग वाला एक पारंपरिक पौधा है, जिसके नाम का अर्थ है “मां द्वारा तैयार भोजन।” इसका फल खाया जाता था, अनुष्ठानों में इस्तेमाल होता था और सर्दी-जुकाम या अन्य तकलीफों के लिए सुखाकर चूर्ण बनाया जाता था। समुदाय की सहमति लेने के बाद एजेंसी ने प्रसंस्कृत नानझुआंग संतरे और श्वसन संबंधी एक संभावित उपयोग से जुड़े शोध का पेटेंट कराया। इसके बाद उसने उस समुदाय को इसका लाइसेंस देने की दिशा में कदम बढ़ाया जहां से यह पौधा और उससे जुड़ा ज्ञान मिला था, ताकि भविष्य के व्यावसायिक लाभ साझा किए जा सकें। पशुओं पर शोध में फेफड़ों की सूजन के संकेतकों में कमी मिली, लेकिन इससे न तो मनुष्यों में उपचार कारगर होने का प्रमाण मिलता है, न ही इसे दवा की मंजूरी माना जा सकता है।