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ताइवान ने 1961 में झूठे आरोपों में फंसाए गए पांच मूलनिवासी पीड़ितों की प्रतिष्ठा बहाल की
ताइवान ने बुनुन समुदाय के उन पांच चर्च कर्मियों की प्रतिष्ठा औपचारिक रूप से बहाल की है, जिन पर 1961 में विद्रोह की साजिश रचने के झूठे आरोप लगाए गए थे। इससे उनके परिवारों को लंबे समय से मांगी जा रही आधिकारिक मान्यता मिली है। हुआलिएन काउंटी के झुओले समुदाय में आयोजित स्मृति सभा में उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम ने प्रतिष्ठा बहाली के प्रमाणपत्र सौंपे और इस गैरकानूनी अत्याचार के लिए राज्य की ओर से झुककर माफी मांगी।
यह मामला तब शुरू हुआ था जब एक पुलिस अधिकारी ने चर्च के एक मिशनरी के बिस्तर के नीचे एक हथगोला और राजनीतिक पर्चे रख दिए और फिर उसे तथा चार अन्य प्रेस्बिटेरियन चर्च नेताओं और कर्मियों को फंसा दिया। पांचों को युली पुलिस स्टेशन में आठ दिन तक हिरासत में रखा गया और जबरदस्ती तथा यातना का शिकार बनाया गया। इसमें उनकी उंगलियों में सुइयां चुभाना, जबरन नमक का पानी पिलाना और बाइबिल को पैरों तले रौंदने का आदेश देना शामिल था। जांच में साबित हुआ कि उन्हें फंसाया गया था और उन्हें बिना मुकदमा चलाए रिहा कर दिया गया।
तब से पांचों पुरुषों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके रिश्तेदारों, चर्च और समुदाय ने इस घटनाक्रम की स्मृति बनाए रखी और न्याय के लिए प्रयास जारी रखे। चर्च के पास इस घटना को दर्शाने वाले एक भित्तिचित्र के साथ चीनी और बुनुन भाषाओं में एक स्मारक पट्टिका का अनावरण किया गया। शियाओ ने कहा कि एक समारोह पीढ़ियों से चले आ रहे भय और अविश्वास को मिटा नहीं सकता, लेकिन उन्होंने संकल्प जताया कि ऐतिहासिक घावों को भरने का राज्य का काम जारी रहेगा।