
स्वास्थ्य और उपचार
जीन-संपादन उपचार के बाद किशोर को अब रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं
बर्लिन के शारिटे अस्पताल के अनुसार, जीन-संपादन उपचार मिलने के चार महीने बाद 19 वर्षीय मोहम्मद अब रक्त चढ़ाने पर निर्भर नहीं हैं। अस्पताल का कहना है कि जर्मनी में पहली बार CRISPR-आधारित इस उपचार का इस्तेमाल किसी क्लिनिकल परीक्षण के बजाय नियमित चिकित्सा में किया गया है।
मोहम्मद को बीटा-थैलेसीमिया है। यह एक आनुवंशिक विकार है, जो लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले प्रोटीन हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बाधित करता है। इस बीमारी के गंभीर रूप से पीड़ित लोगों को लगभग हर तीन सप्ताह में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, जिसके समय के साथ गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
Casgevy नाम से बेचे जाने वाले इस उपचार में मरीज की अपनी रक्त बनाने वाली स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल होता है। प्रयोगशाला में इनका संपादन किया जाता है, ताकि वे हीमोग्लोबिन का वह रूप बना सकें जो सामान्यतः जन्म से पहले बनता है। मोहम्मद को मई में संशोधित कोशिकाएं दी गई थीं; अब उनका हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य सीमा में है।
यह प्रक्रिया कठिन है: मरीजों को पहले उच्च खुराक वाली कीमोथेरेपी देनी पड़ती है, जिससे यकृत को नुकसान और बांझपन हो सकता है। दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रभावशीलता अब भी अनिश्चित हैं, और उपचार पाने वाले मरीजों की 15 वर्षों तक निगरानी जरूरी है। यूरोपीय संघ में 2024 से 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कुछ मरीजों के लिए इस उपचार को सशर्त मंजूरी मिली हुई है।
फिलहाल, यह बदलाव चिकित्सा के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में भी दिख रहा है: शारिटे का कहना है कि मोहम्मद सामान्य दैनिक जीवन जी सकते हैं और व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू करना चाहते हैं।