
विज्ञान और खोज
रेत हटाने में नदियों की बराबरी कर सकते हैं समुद्र तट के नन्हे खोदने वाले जीव
कैलिफ़ोर्निया के इस्ला विस्टा बीच पर हुए एक नए अध्ययन ने सैंड हॉपर की हैरतअंगेज खुदाई क्षमता मापी है: झींगे जैसे इन नन्हे जीवों में से प्रत्येक एक बिल खोदने में अपने शरीर के वजन से दस गुना से भी अधिक रेत निकालता है।
ये जीव रात में किनारे पर बहकर आए केल्प और समुद्री शैवाल खाने निकलते हैं, फिर नम रेत में नए घर खोदते हैं। शोधकर्ताओं ने ऊंचे ज्वार के बाद भूखंड चिह्नित किए और सुबह लौटकर सतह के ऊपर जमा रेत को एकत्र किया तथा तौला। सबसे अधिक गतिविधि वाले हिस्सों में एक रात के दौरान तटरेखा के प्रति मीटर में 50 किलोग्राम तक रेत निकली।
जब दल ने अपने अनुमानों को दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया की 25 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर लागू किया, तो हटाई गई रेत की मात्रा क्षेत्र की कुछ नदियों द्वारा रोज बहाकर ले जाई जाने वाली तलछट के बराबर थी। ये निष्कर्ष Journal of Geophysical Research: Earth Surface में प्रकाशित हुए।
इस तुलना की एक महत्वपूर्ण सीमा है: प्रत्यक्ष मापन गर्मियों की केवल एक रात में, एक ही समुद्र तट पर किए गए थे। शोधकर्ताओं को अभी नहीं पता कि निकाली गई रेत में से कितनी वापस बैठ जाती है और कितनी हवा तथा लहरों के साथ बह जाती है, जो संभवतः रेत के टीले बनाने में मदद कर सकती है।
फिर भी ये जीव पहले से कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं: वे समुद्री शैवाल के पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं और तटीय पक्षियों का भोजन बनते हैं। मशीनों से समुद्र तट की सफाई और समतलीकरण उनके भोजन को हटा सकता है तथा उनके बिलों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह अध्ययन तटीय प्रबंधकों को समुद्र तटों की देखभाल करते समय आसानी से अनदेखे रह जाने वाले इन जीवों पर ध्यान देने का एक और कारण देता है।