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तटीय कर्नाटक के प्रशासन में तुलु को मिला आधिकारिक स्थान
कर्नाटक ने स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी करते हुए दो तटीय जिलों में तुलु को अतिरिक्त राजभाषा का दर्जा देने की मंजूरी दी है। इस फैसले से क्षेत्रीय भाषा को भारत के इस पूरे राज्य के बजाय दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के प्रशासन में औपचारिक भूमिका मिलेगी।
18 सितंबर को मंगलुरु में कैबिनेट बैठक के बाद घोषित इस बदलाव को दोनों जिलों के प्रशासन लागू करेंगे। सरकार ने कहा कि वह अनुवाद, प्रशिक्षण और भाषा के इस्तेमाल के लिए हर साल 82 लाख रुपये देगी, ताकि मान्यता के साथ उसे अमल में लाने के संसाधन भी मिलें।
तुलु दोनों जिलों और पड़ोसी राज्य केरल के उत्तरी हिस्से में स्थित कासरगोड में व्यापक रूप से बोली जाती है। इसके भाषी इस क्षेत्र को तुलु नाडु कहते हैं। पड़ोसी भाषाओं कन्नड़ और मलयालम के साथ तुलु की अपनी अलग पहचान है।
यह मंजूरी आधिकारिक मान्यता पर विचार करने के पहले के प्रयास के बाद आई है। पिछली सरकार द्वारा नियुक्त समिति ने सिफारिशें दी थीं, लेकिन उस समय कोई फैसला नहीं हुआ था। नई प्रतिबद्धता प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है और अब स्थानीय प्रशासनिक कामकाज में तुलु को शामिल करने की जिम्मेदारी जिला अधिकारियों की है।