
फलती-फूलती प्रकृति
भारत में नवीकरणीय बिजली के विस्तार से ईंधन आयात पर अरबों डॉलर की बचत
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, भारत की नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई है और एक दशक में लगभग चार गुनी हो चुकी है। इस विस्तार से आयातित ईंधन पर निर्भरता भी घट रही है: एजेंसी का अनुमान है कि नवीकरणीय बिजली की मदद से 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का खर्च बचा।
अपनी भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026 में IEA का अनुमान है कि 2030 तक नवीकरणीय क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और इस वृद्धि में सौर पैनलों का योगदान 80% से अधिक होगा। यह वृद्धि भारत को दशक के अंत तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की राह पर ले जाएगी।
लाभ केवल स्थापित उपकरणों तक सीमित नहीं हैं। नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन 2025 से 2030 के बीच लगभग दोगुना होने का अनुमान है, जिससे भारत के कुल बिजली उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी लगभग एक चौथाई से बढ़कर 35% हो जाएगी।
एजेंसी इस प्रगति का श्रेय प्रतिस्पर्धी नीलामियों, सहायक नीतियों, प्रौद्योगिकी की घटती लागत और कारोबारी क्षेत्र की बढ़ती मांग को देती है। छतों पर लगने वाली सौर प्रणालियां भी इस विस्तार को बड़ी बिजली परियोजनाओं से आगे ले जाने में मदद कर रही हैं।
इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए बिजली पारेषण नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण का अधिक तेजी से विस्तार करना होगा। परियोजनाओं में देरी और बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति अब भी बाधाएं हैं। IEA का अनुमान है कि इन अड़चनों को दूर करने से 2026–2030 के दौरान नवीकरणीय क्षमता की स्थापना में 20% से अधिक तेजी आ सकती है।