
फलती-फूलती प्रकृति
बचाव कार्यों के रिकॉर्ड से बाँग्का स्लो लोरिस के अब भी जीवित होने की पुष्टि
इंडोनेशिया के बाँग्का द्वीप पर 90 से अधिक बाँग्का स्लो लोरिस के मिलने का दस्तावेजी प्रमाण दर्ज किया गया है। इससे पुष्टि होती है कि जिस प्राइमेट के विलुप्त होने की आशंका थी, वह कई इलाकों में जीवित है। बचाए गए जीवों में से 86 को उपयुक्त प्राकृतिक आवासों में वापस छोड़ दिया गया।
यह प्रमाण Spixiana पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन से मिला है, जो 2015 से 2025 के Alobi Wildlife Rescue Center के रिकॉर्ड पर आधारित है। सुमात्रा के तट से दूर स्थित बाँग्का के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने बगीचों, घरों के पास, बिजली के तारों पर और सड़कों के किनारे लोरिस मिलने पर केंद्र से संपर्क किया। उनकी जानकारी और केंद्र के काम ने वैज्ञानिक समझ में लंबे समय से बनी कमी को दूर करने में मदद की।
लालिमा लिए भूरे फर और बड़ी आँखों वाला यह छोटा, रात में सक्रिय रहने वाला प्राइमेट 1930 के दशक से वैज्ञानिक साहित्य में दर्ज नहीं हुआ था। 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त और संभवतः विलुप्त की श्रेणी में रखा था। फिर भी, उसी द्वीप पर रहने वाले लोगों के जीवन से यह गायब नहीं हुआ था।
इसके जीवित होने की पुष्टि इस बात का प्रमाण नहीं है कि प्रजाति की स्थिति सुधर रही है। टिन खनन और ऑयल पाम के बागानों के लिए जंगल साफ किए जाने से इसका वन आवास घटा है, जबकि बचाए गए कुछ जीव बिजली के तारों से गंभीर रूप से घायल हुए थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिकताएँ बाँग्का के बचे हुए प्राकृतिक वनों की रक्षा करना और व्यवस्थित सर्वेक्षण करना हैं, ताकि पता चल सके कि लोरिस कहाँ रहते हैं और कितने बचे हैं। बचाव कार्यों के रिकॉर्ड इसके लिए एक मूल्यवान शुरुआती आधार देते हैं।