
विज्ञान और खोज
सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन ने पहली आकाशगंगाओं के उदय का क्रम दिखाया
वैज्ञानिकों ने एक कंप्यूटर सिमुलेशन तैयार किया है जो आरंभिक ब्रह्मांड के लगभग 2 अरब वर्षों का अनुसरण करते हुए दिखाता है कि पहले तारे और आकाशगंगाएं कैसे बने और उन्होंने अपने आसपास की गैस को कैसे बदला। Lumina नाम का यह सिमुलेशन ब्रह्मांड के विशाल परिदृश्य के साथ इतना बारीक विवरण भी प्रस्तुत करता है कि विकसित हो रही अलग-अलग आकाशगंगाओं का अध्ययन किया जा सके।
MIT, हार्वर्ड, स्मिथसोनियन और साझेदार संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार यह मॉडल अमेरिका के टेनेसी स्थित ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी के Frontier सुपरकंप्यूटर पर चलाया गया। यह पहले के तुलनीय सिमुलेशनों से लगभग 100 गुना बड़े आयतन में डार्क मैटर, गैस, तारों और विकिरण का अनुसरण करता है।
इसकी एक प्रमुख उपलब्धि हाइड्रोजन और हीलियम, दोनों में उन बदलावों का मॉडल बनाना है जो विकिरण द्वारा उनके इलेक्ट्रॉन अलग कर दिए जाने पर होते हैं। इस प्रक्रिया को पुनःआयनीकरण कहते हैं। सिमुलेशन में शुरुआती तारों और आकाशगंगाओं का प्रकाश हाइड्रोजन में बदलाव लाता है, जबकि सक्रिय रूप से पदार्थ निगल रहे अतिविशाल ब्लैक होल से जुड़ा अधिक ऊर्जावान विकिरण हीलियम में बदलाव लाता है।
ये पूर्वानुमान हैं, प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं। टीम Lumina को अन्य वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध करा रही है, ताकि वे इसमें निर्मित आकाशगंगाओं की तुलना James Webb जैसी दूरबीनों के अवलोकनों और भविष्य के सर्वेक्षणों से कर सकें। ऐसी तुलनाओं से इस बात की व्याख्याओं को परखा जा सकता है कि शुरुआती ब्रह्मांडीय संरचनाएं कैसे बनीं और मौजूदा सिद्धांतों में कहां सुधार की जरूरत है।