
विज्ञान और खोज
नई ‘वाणी घड़ी’ से मस्तिष्क की उम्र बढ़ने के संकेत मिले
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘वाणी घड़ी’ विकसित की है जो बोलने की छोटी रिकॉर्डिंग से किसी व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाती है और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य तथा जैविक उम्र बढ़ने से जुड़े पैटर्न उजागर करती है।
Science Advances में प्रकाशित अध्ययन में अर्जेंटीना, चिली, कोलंबिया, मेक्सिको और पेरू के 2,928 स्पेनिश-भाषी वयस्कों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों में स्वस्थ लोगों के साथ हल्की संज्ञानात्मक हानि, अल्जाइमर रोग या अन्य प्रकार के डिमेंशिया से ग्रस्त लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग की मदद से स्वर की ऊंचाई, बोलने की गति, विराम और शब्दावली सहित 700 से अधिक विशेषताओं को जोड़कर उम्र का अनुमान निकाला।
जब यह अनुमान किसी व्यक्ति की वास्तविक उम्र से अधिक था, तो यह अंतर कमजोर याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता के साथ-साथ मस्तिष्क और जैविक उम्र बढ़ने के स्वतंत्र मापों से जुड़ा पाया गया। स्वस्थ प्रतिभागियों में आम तौर पर वाणी से अनुमानित उम्र और वास्तविक उम्र के बीच अंतर कम था।
बोलने की रिकॉर्डिंग एक गैर-आक्रामक प्रक्रिया है और इसे दूर से, बार-बार तथा कम लागत पर किया जा सकता है। इससे यह तरीका उन समुदायों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां उन्नत जांच की सुविधा पाना कठिन है। यह शोध ऐसे क्षेत्र पर भी आधारित है जिसका डिमेंशिया अध्ययनों में ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व रहा है।
यह उपकरण डिमेंशिया के निदान की जांच नहीं है और अध्ययन यह स्थापित नहीं करता कि इससे भविष्य में संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है या नहीं। चिकित्सकीय देखभाल में इसका उपयोग करने से पहले शोधकर्ताओं को लंबे समय तक लोगों का अध्ययन करना और अन्य भाषाओं, संस्कृतियों तथा अधिक स्वाभाविक बोलचाल की परिस्थितियों में इस तरीके की पुष्टि करना अभी बाकी है।