
विज्ञान और खोज
सूक्ष्म छिद्रों से कीमती धातुओं के बिना रासायनिक उत्पादन का नया रास्ता खुला
चीन के शोधकर्ताओं ने दो ऐसी अभिक्रियाओं का प्रदर्शन किया है, जो कीमती धातुओं के उत्प्रेरकों के बिना उपयोगी औद्योगिक अम्ल बनाती हैं। इनकी जगह एक छिद्रयुक्त क्रिस्टलीय पदार्थ रासायनिक प्रक्रिया को दिशा देता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में दोनों अभिक्रियाएं लगातार 750 घंटे चलीं।
चीनी विज्ञान अकादमी के डालियान रासायनिक भौतिकी संस्थान में लियू झोंगमिन की टीम के नेतृत्व में किया गया यह शोध 21 अक्टूबर को Nature में प्रकाशित हुआ।
यह शोध कार्बोनाइलेशन से जुड़ा है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड को अन्य अणुओं में शामिल किया जाता है। इस तरह की अभिक्रियाओं से विलायकों से लेकर दवाओं के घटकों तक अनेक उत्पाद बनाने में मदद मिलती है। व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक विधियां रोडियम या इरिडियम जैसी महंगी धातुओं पर निर्भर हैं और तैयार उत्पादों से उत्प्रेरकों को अलग करना मुश्किल हो सकता है।
टीम ने कार्बन मोनोऑक्साइड और पानी का उपयोग करते हुए एथिलीन से प्रोपियोनिक अम्ल और प्रोपिलीन से आइसोब्यूटिरिक अम्ल बनाने के लिए आणविक छलनी इस्तेमाल की। यह ऐसा क्रिस्टल है, जिसमें अणुओं के आकार के छिद्रों का जाल होता है। छिद्रों का आकार और स्थान अभिक्रियाओं को वांछित उत्पादों की ओर ले जाने में मदद करते हैं और साथ ही उन अवांछित अभिक्रियाओं को दबाते हैं, जो उत्प्रेरक को निष्क्रिय कर सकती हैं।
लगभग एक महीने तक चले उच्च-दाब परीक्षणों में उत्पाद चयनात्मकता आइसोब्यूटिरिक अम्ल के लिए लगभग 95% और प्रोपियोनिक अम्ल के लिए 80% तक पहुंची। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रत्येक अभिक्रिया ने वांछित रसायन के निर्माण को कितनी प्राथमिकता दी, न कि शुरुआती पदार्थ का कितना हिस्सा परिवर्तित हुआ।
नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन प्रक्रिया अभी औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है। शोधकर्ताओं की योजना इसकी कार्यक्षमता बेहतर करने और बड़े पैमाने के परीक्षणों की ओर बढ़ने की है।