
विज्ञान और खोज
खगोलविदों ने पहचाना ऐसा तारा जो हरा दिखाई देगा
इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरिक के खगोलविदों ने एक ऐसे तारकीय अवशेष की पहचान की है, जो उनकी गणनाओं के अनुसार मानव आंखों को पीला-हरा दिखाई देगा। टीम का कहना है कि यह हरे तारे का पहला विश्वसनीय उदाहरण है।
WD J1330+6435 नाम का यह पिंड पृथ्वी से लगभग 280 प्रकाश-वर्ष दूर है। यह एक श्वेत वामन है—वह सघन केंद्रक, जो सूर्य जैसे किसी तारे के जीवन के अंत में बच जाता है। इतनी दूरी से इसका रंग सीधे नहीं देखा जा सकता। इसके बजाय शोधकर्ताओं ने मानव रंग-दृष्टि के एक मॉडल का इस्तेमाल करके इसके वर्णक्रम, यानी इसके प्रकाश में तरंगदैर्घ्यों के पैटर्न, का विश्लेषण किया।
ज्यादातर तारों का रंग मुख्यतः उनके तापमान पर निर्भर करता है। यहां रासायनिक संरचना स्थिति बदल देती है। इस श्वेत वामन के ग्रहीय तंत्र के चट्टानी मलबे ने इसके वायुमंडल में सोडियम सहित कई तत्व पहुंचाए हैं। वायुमंडल की अत्यंत सघन परिस्थितियों में सोडियम पीले, नारंगी और कुछ लाल प्रकाश के एक व्यापक बैंड को अवशोषित कर लेता है, जिससे प्रकाश में हरे रंग की झलक आ जाती है।
RAS Techniques and Instruments में प्रकाशित अध्ययन में यह भी पाया गया कि श्वेत वामन गुलाबी, बैंगनी, पीले और सियान रंग के दिखाई दे सकते हैं। पृथ्वी से लगभग 65 प्रकाश-वर्ष के भीतर मौजूद 151 श्वेत वामनों के एक अलग नमूने में पांच के रंग असामान्य थे। इससे संकेत मिलता है कि लगभग हर 30 में से एक श्वेत वामन तारों के परिचित रंगों की श्रेणी से अलग हो सकता है।