प्रौद्योगिकी और नवाचार

परमाणुओं की अदला-बदली से एक ही अति-पतली फिल्म में बने ट्रांजिस्टर के प्रमुख हिस्से

दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने एक अति-पतले पदार्थ में चुनिंदा परमाणुओं को बदलकर कार्यशील ट्रांजिस्टर बनाए हैं। अलग-अलग पदार्थों की परतें जोड़ने के बजाय उन्होंने एक ही फिल्म के भीतर प्रमुख घटक तैयार किए।

इंस्टीट्यूट फॉर बेसिक साइंस की टीम ने Science में इस काम की जानकारी दी। इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में इस्तेमाल होने वाले छोटे स्विच यानी ट्रांजिस्टर को अर्धचालक, विद्युतरोधन और विद्युत संपर्कों की जरूरत होती है। परमाण्विक स्तर पर पतले पदार्थों में इन हिस्सों को जोड़ना विशेष रूप से कठिन है: कोटिंग असमान हो सकती है और धातु के संपर्क जोड़ने से सतह को नुकसान पहुंच सकता है या विद्युत धारा बाधित हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने टंगस्टन और सेलेनियम वाली एक फिल्म से शुरुआत की। टंगस्टन को यथास्थान रखते हुए उन्होंने चुनिंदा सेलेनियम परमाणुओं को बदलकर विद्युतरोधी क्षेत्र, एक अलग अर्धचालक और अत्यधिक सुचालक संपर्क परतें बनाईं। उन्होंने एक बार में एक परमाण्विक परत में बदलाव को नियंत्रित किया। हर परत लगभग 0.7 नैनोमीटर मोटी थी, यानी एक मीटर के अरबवें हिस्से से भी कम।

परीक्षणों में तैयार ट्रांजिस्टर की धारा दस गुना बदलने के लिए वोल्टेज में 61.3 मिलीवोल्ट के बदलाव की जरूरत पड़ी। यह कमरे के तापमान पर पारंपरिक ट्रांजिस्टरों के लिए लगभग 60 मिलीवोल्ट की सैद्धांतिक न्यूनतम सीमा के करीब है। टीम ने दो प्रकार के ट्रांजिस्टरों को एक के ऊपर एक रखकर संकेत उलटने वाला एक बुनियादी परिपथ भी बनाया, जो एक वोल्ट पर काम करता था।

यह तरीका छोटे और कम बिजली खपत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण सरल बना सकता है। लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा होने से पहले शोधकर्ताओं को दिखाना होगा कि चिप उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली बड़ी सतहों पर ये परमाण्विक प्रतिस्थापन एकसमान और विश्वसनीय ढंग से काम करते हैं।

स्रोत

  1. 연합뉴스원자 바꿔 2D 반도체 소재 자유자재로...차세대 고성능 소자 구현
  2. inews24복잡한 물질 적층 공정 간소화→초미세·초저전력 반도체 만든다 [지금은 과학]
  3. 아시아경제반도체도 '레고'처럼 만든다...원자 바꿔 절연막·전극까지 한 번에[과학을읽다]

रिपोर्टिंग संबंधी टिप्पणियाँ

यह जानकारी कहाँ से आई

과학기술정보통신부

योनहाप न्यूज़ और inews24 ने स्पष्ट रूप से विज्ञान एवं सूचना-संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय की घोषणा की जानकारी दी है। एशिया इकोनॉमी ने घोषणा का श्रेय संयुक्त रूप से विज्ञान एवं सूचना-संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इंस्टीट्यूट फॉर बेसिक साइंस (IBS) को दिया है। इन लेखों को प्रयोग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

기초과학연구원(IBS)

एशिया इकोनॉमी बताता है कि विज्ञान एवं सूचना-संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इंस्टीट्यूट फॉर बेसिक साइंस (IBS) ने संयुक्त रूप से इस उपलब्धि की घोषणा की। इससे किसी अनुमानित मध्यस्थ शृंखला के बजाय एक अतिरिक्त प्रत्यक्ष संस्थागत स्रोत स्थापित होता है।