विज्ञान और खोज

जकार्ता मेट्रो परियोजना में मिलीं 4,000 से अधिक ऐतिहासिक वस्तुएं और अवशेष

जकार्ता में मेट्रो विस्तार पर काम कर रहे पुरातत्वविदों को 4,000 से अधिक पुरावस्तुएं और अन्य ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। ये खोजें एशिया भर में इंडोनेशिया के पुराने व्यापारिक संबंधों के भौतिक साक्ष्यों में इजाफा करती हैं।

ये वस्तुएं बुंदारन होटल इंडोनेशिया और कोटा के बीच चरण 2A की लाइन के निर्माण के दौरान मिली हैं। इनमें पकी मिट्टी की जल नालियां, नदी की दीवारों से जुड़े खंभे और जापान, चीन, वियतनाम, थाईलैंड तथा कंबोडिया से संबंधित मृद्भांड शामिल हैं।

परियोजना से जुड़े पुरातत्वविद् जुनुस सात्रिया अत्मोजो ने कहा कि निर्माण आगे बढ़ने के साथ खोजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मृद्भांडों की तुलना और विश्लेषण से शोधकर्ताओं को एशिया के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले समुद्री मार्गों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। लगभग 200 वस्तुएं टोक्यो स्थित इंडोनेशियाई दूतावास में प्रदर्शित की जा चुकी हैं, जहां लोगों ने उनमें काफी दिलचस्पी दिखाई।

संरक्षण को परियोजना के काम का हिस्सा बनाया गया है। पुरातत्वविद् परियोजना के डिजाइन चरण से ही जुड़े थे और खोजों का त्रि-आयामी स्कैनिंग तथा फोटोग्राफिक मानचित्रण के जरिए दस्तावेजीकरण किया गया है। कुछ वस्तुएं भंडारण और संरक्षण के लिए जकार्ता के संस्कृति विभाग को सौंपी गई हैं।

सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले इन वस्तुओं का चयन किया जाएगा और उन्हें प्रदर्शनी के लिए तैयार किया जाएगा। जकार्ता कोटा स्टेशन पर प्रस्तावित एक दीर्घा यात्रियों और अन्य आगंतुकों को इन खोजों से परिचित कराएगी। इस तरह शहर के अतीत के साक्ष्य रोजमर्रा की यात्राओं के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पर उपलब्ध होंगे।

स्रोत

  1. ANTARA News - The Indonesian News AgencyTim ahli temukan lebih 4.000 artefak dari proyek MRT Jakarta Fase 2A
  2. Koran Jakarta ®4.000 Artefak Terkumpul dari Proyek MRT

रिपोर्टिंग संबंधी टिप्पणियाँ

यह जानकारी कहाँ से आई

Unknown

ANTARA ने जुनुस सात्रिया अत्मोजो के बयानों का संदर्भ गुरुवार को जकार्ता कोटा स्टेशन पर हुए हस्तांतरण कार्यक्रम से जोड़ा है और लुत्फिया मिरांडा पुत्री को अपनी संवाददाता बताया है।

Ant

Koran Jakarta ® के अंत में “Ant/G-1” का श्रेय दिया गया है और रिपोर्ट काफी हद तक ANTARA के विवरण का अनुसरण करती है। साथ ही इसमें संरक्षण, स्कैनिंग और पुरातत्वविदों की भागीदारी के बारे में अतिरिक्त बयान भी हैं।