
विज्ञान और खोज
मिस्र में पिरामिड के आकार के मकबरे में मिली प्राचीन यूनानी कविता
मिस्र के पुरातत्वविदों ने दाखला नखलिस्तान में मिट्टी की ईंटों से बना पिरामिड के आकार का एक मकबरा खोजा है। इसमें मिले दुर्लभ अभिलेख रोमन काल के मिस्र के जीवन और मान्यताओं पर रोशनी डालते हैं। पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने बताया कि बीर अल-शगाला का यह मकबरा एक पुरुष और उसकी पत्नी के लिए बनाया गया था।
खोजी गई वस्तुओं में पत्थर की एक पट्टिका भी है, जिस पर प्राचीन यूनानी भाषा में लाल स्याही से 19 पंक्तियों की शोक कविता लिखी है। यह कविता तीसरी शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध से चौथी शताब्दी ईस्वी के आरंभ की है। शुरुआती अध्ययन संकेत देता है कि जिस व्यक्ति की स्मृति में यह लिखी गई थी, वह संभवतः न्यायाधीश था।
मकबरे में प्राचीन मिस्री परंपराओं का भी गहरा प्रभाव है। 14 सीढ़ियों का एक सोपान बलुआ पत्थर के प्रवेशद्वार तक जाता है, जिसे सुरक्षा के लिए चित्रलिपि में लिखे मंत्रों, पंखों वाले सूर्य और दो नागों से सजाया गया है। इसके आगे एक मेहराबदार हॉल और पिरामिड के आकार की संरचना के नीचे दो दफ़न कक्ष हैं।
पुरातत्वविदों को मिट्टी के बर्तन, बलुआ पत्थर की भेंट-मेज़ और शुद्धिकरण का कुंड, तथा रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन की छवि वाला कांसे का एक सिक्का भी मिला। संरचनात्मक अवशेष संकेत देते हैं कि बाद में मकबरे का फिर से उपयोग किया गया हो सकता है।
बीर अल-शगाला में खुदाई 2002 में शुरू हुई थी। कविता, धार्मिक चित्रांकन और वस्तुएं मिलकर रोमन शासन के अधीन नखलिस्तान के एक समुदाय के साहित्यिक और आध्यात्मिक जीवन की अधिक संपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।